Heart Broken Poetry (page 184)
बज़्म-ए-दुश्मन में बुलाते हो ये क्या करते हो
बेख़ुद देहलवी
बनी थी दिल पे कुछ ऐसी की इज़्तिराब न था
बेख़ुद देहलवी
और साक़ी पिला अभी क्या है
बेख़ुद देहलवी
ऐसा बना दिया तुझे क़ुदरत ख़ुदा की है
बेख़ुद देहलवी
अदू को देख के जब वो इधर को देखते हैं
बेख़ुद देहलवी
अब किसी बात का तालिब दिल-ए-नाशाद नहीं
बेख़ुद देहलवी
आशिक़ समझ रहे हैं मुझे दिल लगी से आप
बेख़ुद देहलवी
आप हैं बे-गुनाह क्या कहना
बेख़ुद देहलवी
आ गए फिर तिरे अरमान मिटाने हम को
बेख़ुद देहलवी
आँसू मिरी आँखों में हैं नाले मिरे लब पर
बेखुद बदायुनी
शिकवा सुन कर जो मिज़ाज-ए-बुत-ए-बद-ख़ू बदला
बेखुद बदायुनी
साथ साथ अहल-ए-तमन्ना का वो मुज़्तर जाना
बेखुद बदायुनी
रक़ीबों का मुझ से गिला हो रहा है
बेखुद बदायुनी
पयाम ले के जो पैग़ाम-बर रवाना हुआ
बेखुद बदायुनी
क्यूँ मिरा हाल क़िस्सा-ख़्वाँ से सुनो
बेखुद बदायुनी
जिस में सौदा नहीं वो सर ही नहीं
बेखुद बदायुनी
इस बज़्म में न होश रहेगा ज़रा मुझे
बेखुद बदायुनी
हासिल उस मह-लक़ा की दीद नहीं
बेखुद बदायुनी
हश्र पर वा'दा-ए-दीदार है किस का तेरा
बेखुद बदायुनी
गर्दिश-ए-चश्म-ए-यार ने मारा
बेखुद बदायुनी
दर्द-ए-दिल में कमी न हो जाए
बेखुद बदायुनी
आह करना दिल-ए-हज़ीं न कहीं
बेखुद बदायुनी
वो थे जवाब के साहिल पे मुंतज़िर लेकिन
बेकल उत्साही
न जाने कौन सा नश्शा है उन पे छाया हुआ
बेकल उत्साही
यूँ तो कहने को तिरी राह का पत्थर निकला
बेकल उत्साही
उधर वो हाथों के पत्थर बदलते रहते हैं
बेकल उत्साही
तो पहले मेरा ही हाल-ए-तबाह लिख लीजे
बेकल उत्साही
तमन्ना बन गई है माया-ए-इल्ज़ाम क्या होगा
बेकल उत्साही
नज़र की फ़त्ह कभी क़ल्ब की शिकस्त लगे
बेकल उत्साही
नए ज़माने में अब ये कमाल होने लगा
बेकल उत्साही