Heart Broken Poetry (page 182)
एक नए साँचे में ढल जाता हूँ मैं
भारत भूषण पन्त
इक गर्दिश-ए-मुदाम भी तक़दीर में रही
भारत भूषण पन्त
दीद की तमन्ना में आँख भर के रोए थे
भारत भूषण पन्त
दयार-ए-ज़ात में जब ख़ामुशी महसूस होती है
भारत भूषण पन्त
दश्त में उड़ते बगूलों की ये मस्ती एक दिन
भारत भूषण पन्त
दानिस्ता जो हो न सके नादानी से हो जाता है
भारत भूषण पन्त
चाहतों के ख़्वाब की ताबीर थी बिल्कुल अलग
भारत भूषण पन्त
अंधेरा मिटता नहीं है मिटाना पड़ता है
भारत भूषण पन्त
आईने से पर्दा कर के देखा जाए
भारत भूषण पन्त
आब की तासीर में हूँ प्यास की शिद्दत में हूँ
भारत भूषण पन्त
न मिला तिरा पता तो मुझे लोग क्या कहेंगे
बेताब लखनवी
तड़प के रह गई बुलबुल क़फ़स में ऐ सय्याद
बेताब अज़ीमाबादी
ज़ाहिदों से न बनी हश्र के दिन भी या-रब
बेख़ुद देहलवी
उन्हें तो सितम का मज़ा पड़ गया है
बेख़ुद देहलवी
तुम्हारी याद मेरा दिल ये दिनों चलते पुर्ज़े हैं
बेख़ुद देहलवी
सौदा-ए-इश्क़ और है वहशत कुछ और शय
बेख़ुद देहलवी
नमक भर कर मिरे ज़ख़्मों में तुम क्या मुस्कुराते हो
बेख़ुद देहलवी
हूरों से न होगी ये मुदारात किसी की
बेख़ुद देहलवी
हमें पीने से मतलब है जगह की क़ैद क्या 'बेख़ुद'
बेख़ुद देहलवी
हमें इस्लाम उसे इतना तअल्लुक़ है अभी बाक़ी
बेख़ुद देहलवी
ग़म में डूबे ही रहे दम न हमारा निकला
बेख़ुद देहलवी
दिल तो लेते हो मगर ये भी रहे याद तुम्हें
बेख़ुद देहलवी
दी क़सम वस्ल में उस बुत को ख़ुदा की तो कहा
बेख़ुद देहलवी
आप को रंज हुआ आप के दुश्मन रोए
बेख़ुद देहलवी
आप शर्मा के न फ़रमाएँ हमें याद नहीं
बेख़ुद देहलवी
वो सुन कर हूर की तारीफ़ पर्दे से निकल आए
बेख़ुद देहलवी
वो देखते जाते हैं कनखियों से इधर भी
बेख़ुद देहलवी
उठे तिरी महफ़िल से तो किस काम के उठ्ठे
बेख़ुद देहलवी
टूटे पड़ते हैं ये हैं किस के ख़रीदार तमाम
बेख़ुद देहलवी
तुम्हें हम चाहते तो हैं मगर क्या
बेख़ुद देहलवी