Heart Broken Poetry (page 185)

न चिलमनों की हसीं सरसराहटें होंगी

बेकल उत्साही

मुझ को शिकस्तगी का क़लक़ देर तक रहा

बेकल उत्साही

ख़ुद अपने जुर्म का मुजरिम को ए'तिराफ़ न था

बेकल उत्साही

फ़स्ल-ए-गुल कब लुटी नहीं मालूम

बेकल उत्साही

दिमाग़ अर्श पे है ख़ुद ज़मीं पे चलते हैं

बेकल उत्साही

ज़िंदा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं

बहज़ाद लखनवी

हम भी ख़ुद को तबाह कर लेते

बहज़ाद लखनवी

तुम याद मुझे आ जाते हो

बहज़ाद लखनवी

तुम से शिकायत क्या करूँ

बहज़ाद लखनवी

उन को बुत समझा था या उन को ख़ुदा समझा था मैं

बहज़ाद लखनवी

तुझ पर मिरी मोहब्बत क़ुर्बान हो न जाए

बहज़ाद लखनवी

तिरे इश्क़ में ज़िंदगानी लुटा दी

बहज़ाद लखनवी

मसरूर भी हूँ ख़ुश भी हूँ लेकिन ख़ुशी नहीं

बहज़ाद लखनवी

लब पे है फ़रियाद अश्कों की रवानी हो चुकी

बहज़ाद लखनवी

क्या ये भी मैं बतला दूँ तू कौन है मैं क्या हूँ

बहज़ाद लखनवी

ख़ुशी महसूस करता हूँ न ग़म महसूस करता हूँ

बहज़ाद लखनवी

ख़ुदा को ढूँड रहा था कहीं ख़ुदा न मिला

बहज़ाद लखनवी

होना ही क्या ज़रूर थे ये दो-जहाँ हैं क्यूँ

बहज़ाद लखनवी

है ख़िरद-मंदी यही बा-होश दीवाना रहे

बहज़ाद लखनवी

फ़रियाद है अब लब पर जब अश्क-फ़िशानी थी

बहज़ाद लखनवी

इक बे-वफ़ा को प्यार किया हाए क्या किया

बहज़ाद लखनवी

इक बेवफ़ा को दर्द का दरमाँ बना लिया

बहज़ाद लखनवी

चश्म-ए-हसीं में है न रुख़-ए-फ़ित्ना-गर में है

बहज़ाद लखनवी

ऐ जज़्बा-ए-दिल गर मैं चाहूँ हर चीज़ मुक़ाबिल आ जाए

बहज़ाद लखनवी

बहुत ज़ोरों पे वी-सी-आर था कल शब जहाँ मैं था

बेदिल जौनपूरी

ये दिल जो मुज़्तरिब रहता बहुत है

बेदिल हैदरी

रात को रोज़ डूब जाता है

बेदिल हैदरी

हो गया चर्ख़-ए-सितमगर का कलेजा ठंडा

बेदिल हैदरी

ये दिल जो मुज़्तरिब रहता बहुत है

बेदिल हैदरी

रहने दे रतजगों में परेशाँ मज़ीद उसे

बेदिल हैदरी