Hope Poetry (page 122)

काश समझदार न बनूँ

अतीया दाऊद

फिर सदा-ए-मोहब्बत सुनी है अभी

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

मिरी मुश्किल अगर आसाँ बना देते तो अच्छा था

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

जीवन-भर की आस है तू

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

अन-गिनत अज़ाब हैं रतजगों के दरमियाँ

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

कटी है उम्र यहाँ एक घर बनाने में

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

फ़लक पर कोई साज़िश हो रही है

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

अल्फ़ाज़ न दे पाएँ अगर साथ बयाँ का

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

आसमाँ गर्दिश में था सारी ज़मीं चक्कर में थी

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

क़रीब से न गुज़र इंतिज़ार बाक़ी रख

अतीक़ असर

शिकायत है बहुत लेकिन गिला अच्छा नहीं लगता

अतीक़ असर

क़रीब से न गुज़र इंतिज़ार बाक़ी रख

अतीक़ असर

शाम के धुँदलकों में डूबता है यूँ सूरज

अतीक़ अंज़र

न मिल सका तरी लहरों में भी क़रार मुझे

अतीक़ अंज़र

मिरे दिल में ख़ुश्बू बसी थी जो वो मकान अपना बदल गई

अतीक़ अंज़र

किसी ने भेजा है ख़त प्यार और वफ़ा लिख कर

अतीक़ अंज़र

कहानियाँ ख़मोश हैं पहेलियाँ उदास हैं

अतीक़ अंज़र

जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है

अतीक़ अंज़र

'अतीक़' बुझता भी कैसे चराग़-ए-दिल मेरा

अतीक़ इलाहाबादी

अगरचे लाई थी कल रात कुछ नजात हवा

अतीक़ इलाहाबादी

शजर से मिल के जो रोने लगा था

अतीक़ अहमद

खिले हैं फूल उसी रंग की सताइश में

अतीक़ अहमद

आई है जाने कैसे इलाक़ों से रौशनी

अतीक़ अहमद

वक़्त ने लूटे हैं हस्ती के ख़ज़ाने कितने

अतीब एजाज़

दिल की दहलीज़ पे दिलबर आया

अतीब एजाज़

किसे दिमाग़ कि उलझे तिलिस्म-ए-ज़ात के साथ

अताउर्रहमान क़ाज़ी

कुछ ख़्वाब कुछ ख़याल में मस्तूर हो गए

अताउर्रहमान जमील

आँसू तुम्हारी आँख में आए तो उठ गए

अताउर्रहमान जमील

वैसे तो इस घर को उस ने चाहे कम ख़ुश-हाली दी

अताउल हसन

तुम्हारे हिज्र का सदक़ा उतार फेंकता है

अताउल हसन