Hope Poetry (page 121)

कुछ और दिन अभी इस जा क़याम करना था

अतीक़ुल्लाह

इस दश्त नवर्दी में जीना बहुत आसाँ था

अतीक़ुल्लाह

फ़रार के लिए जब रास्ता नहीं होगा

अतीक़ुल्लाह

एक सूखी हड्डियों का इस तरफ़ अम्बार था

अतीक़ुल्लाह

चराग़ हाथों के बुझ रहे हैं सितारा हर रह-गुज़र में रख दे

अतीक़ुल्लाह

चलो सुरंग से पहले गुज़र के देखा जाए

अतीक़ुल्लाह

बहुत दिनों में कहीं रास्ते बदलते थे

अतीक़ुल्लाह

आसमाँ का सितारा न महताब है

अतीक़ुल्लाह

आने वाला तो हर इक लम्हा गुज़र जाता है

अतीक़ुल्लाह

जो तकब्बुर से भटकती है ज़बाँ

आतिफ़ ख़ान

धुएँ में डूबे हैं फूल तारे चराग़ जुगनू चिनार कैसे

अतहर सलीमी

फूलों से बहारों में जुदा थे तो हमीं थे

अतहर राज़

जीना है तो जीने का सहारा भी तो होगा

अतहर राज़

ग़म के बादल दिल-ए-नाशाद पे ऐसे छाए

अतहर राज़

पहुँचा दिया उमीद को तूफ़ान-ए-यास तक

अतहर नासिक

ख़ुद को किसी की राह-गुज़र किस लिए करें

अतहर नासिक

ख़ुद को किसी की राहगुज़र किस लिए करें

अतहर नासिक

मैं तेरे क़रीब आते आते

अतहर नफ़ीस

सौ रंग है किस रंग से तस्वीर बनाऊँ

अतहर नफ़ीस

फिर कोई नया ज़ख़्म नया दर्द अता हो

अतहर नफ़ीस

न शाम है न सवेरा अजब दयार में हूँ

अतहर नफ़ीस

लम्हों के अज़ाब सह रहा हूँ

अतहर नफ़ीस

क्या बात निराली है मुझ में किस फ़न में आख़िर यकता हूँ

अतहर नफ़ीस

कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा

अतहर नफ़ीस

दिल की मसर्रतें नई जाँ का मलाल है नया

अतहर नफ़ीस

बे-नियाज़ाना हर इक राह से गुज़रा भी करो

अतहर नफ़ीस

'अतहर' तुम ने इश्क़ किया कुछ तुम भी कहो क्या हाल हुआ

अतहर नफ़ीस

किस दर्जा मिरे शहर की दिलकश है फ़ज़ा भी

अतहर नादिर

उभरा जो चाँद ऊँघती परछाइयाँ मिलीं

अतहर अज़ीज़

दिल तो बरसाता है हर रोज़ ही ग़म के सावन

अतहर अज़ीज़