Hope Poetry (page 154)
अमीर लाख इधर से उधर ज़माना हुआ
अमीर मीनाई
ऐ ज़ब्त देख इश्क़ की उन को ख़बर न हो
अमीर मीनाई
गुम-शुदा
अमीर इमाम
कि जैसे कोई मुसाफ़िर वतन में लौट आए
अमीर इमाम
ख़ुद को हर आरज़ू के उस पार कर लिया है
अमीर इमाम
शाइ'र की दुनिया
अमीर औरंगाबादी
ख़त का इंतिज़ार
अमीर औरंगाबादी
इस दौर से ख़ुलूस मोहब्बत वफ़ा न माँग
अमीर अहमद ख़ुसरव
तुम और हम
अमीक़ हनफ़ी
तशन्नुज
अमीक़ हनफ़ी
तअल्लुक़ तोड़ने वाले
अमीक़ हनफ़ी
परेशानी-ए-दीद
अमीक़ हनफ़ी
दुआ की शाख़ पर
अमीक़ हनफ़ी
आईना-ख़ाने के क़ैदी से
अमीक़ हनफ़ी
मैं हवा हूँ कहाँ वतन मेरा
अमीक़ हनफ़ी
अर्ज़-ए-मुद्दआ करते क्यूँ नहीं किया हम ने
अमीक़ हनफ़ी
'अमीक़' छेड़ ग़ज़ल ग़म की इंतिहा कब है
अमीक़ हनफ़ी
मंज़िल-ए-शम्स-ओ-क़मर से गुज़रे
अमीन राहत चुग़ताई
किसी मकाँ के दरीचे को वा तो होना था
अमीन राहत चुग़ताई
जरस-ए-मय ने पुकारा है उठो और सुनो
अमीन राहत चुग़ताई
जब कोई भी ख़ाक़ान सर-ए-बाम न होगा
अमीन राहत चुग़ताई
हो सके तो दिल-ए-सद-चाक दिखाया जाए
अमीन राहत चुग़ताई
आज वो फूल बना हुस्न-ए-दिल-आरा देखा
अमीन राहत चुग़ताई
नुमूद-ए-रंग-ओ-बू ने मार डाला
अमीन हज़ीं
नुमूद-ए-रंग-ओ-बू ने मार डाला
अमीन हज़ीं
लाले पड़े हैं जान के जीने का एहतिमाम कर
अमीन हज़ीं
अफ़्साना-ए-हयात को दोहरा रहा हूँ मैं
अमीन हज़ीं
तू मुस्कुराती रहे है ये आरज़ू मेरी
अम्बर वसीम इलाहाबादी
आईना देख कर न तो शीशे को देख कर
अम्बर वसीम इलाहाबादी
वहशत
अम्बरीन सलाहुद्दीन