Hope Poetry (page 153)

ज़ाहिद उमीद-ए-रहमत-ए-हक़ और हज्व-ए-मय

अमीर मीनाई

यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले

अमीर मीनाई

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ

अमीर मीनाई

तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर

अमीर मीनाई

तवक़्क़ो' है धोके में आ कर वह पढ़ लें

अमीर मीनाई

शौक़ कहता है पहुँच जाऊँ मैं अब काबे में जल्द

अमीर मीनाई

शाख़ों से बर्ग-ए-गुल नहीं झड़ते हैं बाग़ में

अमीर मीनाई

इन शोख़ हसीनों पे जो माइल नहीं होता

अमीर मीनाई

हटाओ आइना उम्मीद-वार हम भी हैं

अमीर मीनाई

बाद मरने के भी छोड़ी न रिफ़ाक़त मेरी

अमीर मीनाई

आहों से सोज़-ए-इश्क़ मिटाया न जाएगा

अमीर मीनाई

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ

अमीर मीनाई

तिरा क्या काम अब दिल में ग़म-ए-जानाना आता है

अमीर मीनाई

साफ़ कहते हो मगर कुछ नहीं खुलता कहना

अमीर मीनाई

क़िबला-ए-दिल काबा-ए-जाँ और है

अमीर मीनाई

पूछा न जाएगा जो वतन से निकल गया

अमीर मीनाई

फूलों में अगर है बू तुम्हारी

अमीर मीनाई

मुझ मस्त को मय की बू बहुत है

अमीर मीनाई

मिरे बस में या तो या-रब वो सितम-शिआर होता

अमीर मीनाई

मैं रो के आह करूँगा जहाँ रहे न रहे

अमीर मीनाई

क्या रोके क़ज़ा के वार तावीज़

अमीर मीनाई

जब से बुलबुल तू ने दो तिनके लिए

अमीर मीनाई

जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का

अमीर मीनाई

हम जो मस्त-ए-शराब होते हैं

अमीर मीनाई

हटाओ आइना उम्मीद-वार हम भी हैं

अमीर मीनाई

हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी

अमीर मीनाई

हैं न ज़िंदों में न मुर्दों में कमर के आशिक़

अमीर मीनाई

दिल जुदा माल जुदा जान जुदा लेते हैं

अमीर मीनाई

दिल जो सीने में ज़ार सा है कुछ

अमीर मीनाई

बात करने में तो जाती है मुलाक़ात की रात

अमीर मीनाई