Hope Poetry (page 151)

दिल-लगी में हसरत-ए-दिल कुछ निकल जाती तो है

अमीरुल्लाह तस्लीम

बस कि थी रोने की आदत वस्ल में भी यार से

अमीरुल्लाह तस्लीम

आस क्या अब तो उमीद-ए-नाउमीदी भी नहीं

अमीरुल्लाह तस्लीम

वस्ल में बिगड़े बने यार के अक्सर गेसू

अमीरुल्लाह तस्लीम

वस्ल की शब भी अदा-ए-रस्म-ए-हिरमाँ में रहा

अमीरुल्लाह तस्लीम

थक गए तुम हसरत-ए-ज़ौक़-ए-शहादत कम नहीं

अमीरुल्लाह तस्लीम

पारसाई उन की जब याद आएगी

अमीरुल्लाह तस्लीम

ग़ैब से सहरा-नवरदों का मुदावा हो गया

अमीरुल्लाह तस्लीम

गर यही है आदत-ए-तकरार हँसते बोलते

अमीरुल्लाह तस्लीम

चाहता हूँ पहले ख़ुद-बीनी से मौत आए मुझे

अमीरुल्लाह तस्लीम

चारासाज़-ए-ज़ख़्म-ए-दिल वक़्त-ए-रफ़ू रोने लगा

अमीरुल्लाह तस्लीम

भूले से भी न जानिब-ए-अग़्यार देखना

अमीरुल्लाह तस्लीम

बढ़ गई मय पीने से दिल की तमन्ना और भी

अमीरुल्लाह तस्लीम

बाक़ी ही क्या रहा है तुझे माँगने के बाद

आमिर उस्मानी

सुर्ख़ सितारा

आमिर उस्मानी

ख़्वाब जो बिखर गए

आमिर उस्मानी

थी सियाहियों का मस्कन मिरी ज़िंदगी की वादी

आमिर उस्मानी

लौटे कुछ इस तरह तिरी जल्वा-सरा से हम

आमिर उस्मानी

मुझ को ख़ामोशी-ए-हालात से डर लगता है

आमिर रियाज़

यूँ तो बिखरे थे मगर कुछ तो कहीं पर कुछ था

आमिर नज़र

सहर की जुम्बिश क़द-ए-मतानत पे रह गई थी

आमिर नज़र

कुछ सुलगते हुए ख़्वाबों की फ़रावानी है

आमिर नज़र

ख़ेमा-ए-जाँ को जो देखूँ तो शरर-बार लगे

आमिर नज़र

जो भी कुछ ताक़-ए-ख़यालात पे रह जाते हैं

आमिर नज़र

जबीं को चैन कहाँ ज़ेर-ए-लब दुआ है बस

आमिर नज़र

हम कि सरमाया-ए-ईक़ान लिए बैठे हैं

आमिर नज़र

हमारे चेहरों में पिन्हाँ हैं ज़ाविए क्या क्या

आमिर नज़र

फ़िशार-ए-तीरह-शबी से सहर निकल आए

आमिर नज़र

एक इक तार-ए-नफ़स आशुफ़्ता-ए-आहंग था

आमिर नज़र

दरून-ए-जिस्म की दीवार से उभरती है

आमिर नज़र