Hope Poetry (page 149)

तराना-ए-ग़म-ए-पिन्हाँ है हर ख़ुशी अपनी

अमजद नजमी

सुब्ह-दम आया तो क्या हंगाम-ए-शाम आया तो क्या

अमजद नजमी

सोज़ है दिल के दाग़ में अब तक

अमजद नजमी

नहीं कुछ इंतिहा अफ़्सुर्दगी की

अमजद नजमी

न कुछ आलिम समझते हैं न कुछ जाहिल समझते हैं

अमजद नजमी

मुझे दैर भी हो क्यूँ कर न हरम की तरह प्यारा

अमजद नजमी

जो पूछते हैं कि ये इश्क़-ओ-आशिक़ी क्या है

अमजद नजमी

जाएँ कहाँ हम आप का अरमाँ लिए हुए

अमजद नजमी

जब दिल ही नहीं है पहलू में फिर इश्क़ का सौदा कौन करे

अमजद नजमी

देख कर हम को असीर-ए-आरज़ू

अमजद नजमी

बुलबुल-ए-रंगीं-नवा ख़ामोश है

अमजद नजमी

आशुफ़्ता-नवाई से अपनी दुनिया को जगाता जाता हूँ

अमजद नजमी

साए ढलने चराग़ जलने लगे

अमजद इस्लाम अमजद

वो अभी अपने चेहरे में उतरा नहीं

अमजद इस्लाम अमजद

शिकस्त-ए-अना

अमजद इस्लाम अमजद

सेल्फ़ मेड लोगों का अलमिया

अमजद इस्लाम अमजद

सरमाया-ए-जाँ

अमजद इस्लाम अमजद

मोहब्बत की एक नज़्म

अमजद इस्लाम अमजद

फ़ासले

अमजद इस्लाम अमजद

एक कमरा-ए-इम्तिहान में

अमजद इस्लाम अमजद

चश्म-ए-बे-ख़्वाब को सामान बहुत

अमजद इस्लाम अमजद

ऐ वक़्त ज़रा थम जा

अमजद इस्लाम अमजद

ऐ दिल-ए-बे-ख़बर

अमजद इस्लाम अमजद

ज़िंदगी दर्द भी दवा भी थी

अमजद इस्लाम अमजद

ये गर्द-बाद-ए-तमन्ना में घूमते हुए दिन

अमजद इस्लाम अमजद

ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते

अमजद इस्लाम अमजद

तुम्हारा हाथ जब मेरे लरज़ते हाथ से छूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे

अमजद इस्लाम अमजद

शाम ढले जब बस्ती वाले लौट के घर को आते हैं

अमजद इस्लाम अमजद

साए ढलने चराग़ जलने लगे

अमजद इस्लाम अमजद

रात मैं इस कश्मकश में एक पल सोया नहीं

अमजद इस्लाम अमजद