Hope Poetry (page 150)
निकल के हल्क़ा-ए-शाम-ओ-सहर से जाएँ कहीं
अमजद इस्लाम अमजद
न आसमाँ से न दुश्मन के ज़ोर ओ ज़र से हुआ
अमजद इस्लाम अमजद
लहू में तैरते फिरते मलाल से कुछ हैं
अमजद इस्लाम अमजद
लहू में रंग लहराने लगे हैं
अमजद इस्लाम अमजद
कितनी सरकश भी हो सर-फिरी ये हवा रखना रौशन दिया
अमजद इस्लाम अमजद
किसी की आँख में ख़ुद को तलाश करना है
अमजद इस्लाम अमजद
खेल उस ने दिखा के जादू के
अमजद इस्लाम अमजद
कमाल-ए-हुस्न है हुस्न-ए-कमाल से बाहर
अमजद इस्लाम अमजद
कभी रक़्स-ए-शाम-ए-बहार में उसे देखते
अमजद इस्लाम अमजद
कब से हम लोग इस भँवर में हैं
अमजद इस्लाम अमजद
जो दिन था एक मुसीबत तो रात भारी थी
अमजद इस्लाम अमजद
जब भी आँखों में तिरे वस्ल का लम्हा चमका
अमजद इस्लाम अमजद
हुज़ूर-ए-यार में हर्फ़ इल्तिजा के रक्खे थे
अमजद इस्लाम अमजद
हवाएँ लाख चलें लौ सँभलती रहती है
अमजद इस्लाम अमजद
ग़ुबार-ए-दश्त-ए-तलब में हैं रफ़्तगाँ क्या क्या
अमजद इस्लाम अमजद
एक आज़ार हुई जाती है शोहरत हम को
अमजद इस्लाम अमजद
दश्त-ए-दिल में सराब ताज़ा हैं
अमजद इस्लाम अमजद
दश्त-ए-बे-आब की तरह गुज़री
अमजद इस्लाम अमजद
दर-ए-काएनात जो वा करे उसी आगही की तलाश है
अमजद इस्लाम अमजद
बस्तियों में इक सदा-ए-बे-सदा रह जाएगी
अमजद इस्लाम अमजद
अगरचे कोई भी अंधा नहीं था
अमजद इस्लाम अमजद
आईनों में अक्स न हों तो हैरत रहती है
अमजद इस्लाम अमजद
तुझ को मा'लूम नहीं क्या है तिरी यादों से
अमित शर्मा मीत
मुझ को पाने के सिवा और तमन्ना क्या है
अमित शर्मा मीत
इक तरफ़ प्यार है रिश्ता है वफ़ादारी है
अमित शर्मा मीत
अपने हिस्से की अना दूँ तो अना दूँ किस को
अमित शर्मा मीत
जगमगा उट्ठा है रंग मंच
अमित गुप्ता
नासेह ख़ता मुआफ़ सुनें क्या बहार में
अमीरुल्लाह तस्लीम
क्या ख़बर मुझ को ख़िज़ाँ क्या चीज़ है कैसी बहार
अमीरुल्लाह तस्लीम
जाने दे सब्र ओ क़रार ओ होश को
अमीरुल्लाह तस्लीम