Hope Poetry (page 147)
चराग़ चाँद शफ़क़ शाम फूल झील सबा
अंजुम इरफ़ानी
इतनी सारी शामों में एक शाम कर लेना
अंजुम इरफ़ानी
फ़सील-ए-जिस्म पे शब-ख़ूँ शरारतें तेरी
अंजुम इरफ़ानी
ज़ंजीर तो पैरों से थकन बाँधे हुए है
अंजुम बाराबंकवी
कुछ तो नया किया है हवा ने पता करो
अंजुम बाराबंकवी
दिलों से ख़ौफ़ के आसेब-ओ-जिन निकालता है
अंजुम बाराबंकवी
दिल का गुलाब मैं ने जिसे चूम कर दिया
अंजुम बाराबंकवी
ना-उमीदी कुफ़्र है
अंजुम आज़मी
वा'दा है कि जब रोज़-ए-जज़ा आएगा
अंजुम आज़मी
मेरी दुनिया में अभी रक़्स-ए-शरर होता है
अंजुम आज़मी
जो शब भर आँसुओं से तर रहेगा
अंजुम आज़मी
फ़रेब ग़म ही सही दिल ने आरज़ू कर ली
अंजुम आज़मी
एक सौदा है लज़्ज़त-ए-ग़म है
अंजुम आज़मी
आलम-ए-वहशत-ए-तन्हाई है कुछ और नहीं
अंजुम आज़मी
धूप छाँव ज़ेहनों का आसरा नहीं रखते
अंजुम अज़ीमाबादी
परछाइयों के शहर ज़मीं पर बसा दिए
अंजुम अंसारी
क्या बर्बाद जिन को वो तमन्नाएँ तुम्हारी थीं
अनीसा बेगम
मुसलमाँ ग़ौर कर क्यूँ आज तेरी
अनीसा बेगम
बहाए शबनम ने अश्क पैहम नसीम भरती है सर्द आहें
अनीसा बेगम
ऐ दो-जहाँ के मालिक आ'ला है नाम तेरा
अनीसा बेगम
लफ़्ज़ यूँ ख़ामुशी से लड़ते हैं
अनीस अब्र
ख़ामोशी का शहर
अनीस नागी
एक नज़्म
अनीस नागी
एक नज़्म
अनीस नागी
एक नज़्म
अनीस नागी
क्यूँ नहीं होते मुनाजातों के मअनी मुन्कशिफ़
अनीस अशफ़ाक़
म'अरका जब छिड़ गया तो क्या हुआ हम से सुनो
अनीस अशफ़ाक़
हमेशा किसी इम्तिहाँ में रहा
अनीस अशफ़ाक़
पथरीली सी शाम में तुम ने ऐसे याद किया जानम
अनीस अंसारी
दिल पर यूँही चोट लगी तो कुछ दिन ख़ूब मलाल किया
अनीस अंसारी