Hope Poetry (page 145)

तू मिरे सब्र का अंदाज़ा लगा सकता है

अंजुम सलीमी

माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है

अंजुम सलीमी

मैं जिस चराग़ से बैठा था लौ लगाए हुए

अंजुम सलीमी

मैं एक एक तमन्ना से पूछ बैठा हूँ

अंजुम सलीमी

मैं चीख़ता रहा कुछ और भी है मेरा इलाज

अंजुम सलीमी

कहो हवा से कि इतनी चराग़-पा न फिरे

अंजुम सलीमी

हाँ ज़माने की नहीं अपनी तो सुन सकता था

अंजुम सलीमी

विसाल की तीसरी सम्त

अंजुम सलीमी

तन्हाई का सफ़रनामा

अंजुम सलीमी

सरगोशी

अंजुम सलीमी

सारा शगुफ़्ता

अंजुम सलीमी

पुर्सा

अंजुम सलीमी

पानी की आवाज़

अंजुम सलीमी

काश

अंजुम सलीमी

गिर्या

अंजुम सलीमी

एक क़दीम ख़याली की निगरानी में

अंजुम सलीमी

एक महबूस नज़्म

अंजुम सलीमी

एक और मुुहब्बत....

अंजुम सलीमी

आइंदगाँ की उदासी में

अंजुम सलीमी

आधी मौत का जन्म

अंजुम सलीमी

ये मोहब्बत का जो अम्बार पड़ा है मुझ में

अंजुम सलीमी

सहर को खोज चराग़ों पे इंहिसार न कर

अंजुम सलीमी

सब को अपने ज़ेहन से झटका ख़ुद को याद किया

अंजुम सलीमी

रात तिरे ख़्वाबों ने मुझ पर यूँ अर्ज़ानी की

अंजुम सलीमी

ख़ुद अपने हाथ से क्या क्या हुआ नहीं मिरे साथ

अंजुम सलीमी

ख़ाक छानी न किसी दश्त में वहशत की है

अंजुम सलीमी

कल तो तिरे ख़्वाबों ने मुझ पर यूँ अर्ज़ानी की

अंजुम सलीमी

काग़ज़ था मैं दिए पे मुझे रख दिया गया

अंजुम सलीमी

इन दिनों ख़ुद से फ़राग़त ही फ़राग़त है मुझे

अंजुम सलीमी

हवा का तख़्त बिछाता हूँ रक़्स करता हूँ

अंजुम सलीमी