Hope Poetry (page 144)
मैं हर बे-जान हर्फ़-ओ-लफ़्ज़ को गोया बनाता हूँ
अनवर जलालपुरी
शिकस्ता-पा ही सही दूर की सदा ही सही
अनवार फ़िरोज़
यूसुफ़-ए-हुस्न का हुस्न आप ख़रीदार रहा
अनवर देहलवी
नज़र आए क्या मुझ से फ़ानी की सूरत
अनवर देहलवी
न मैं समझा न आप आए कहीं से
अनवर देहलवी
मोहब्बत हो तो बर्क़-ए-जिस्म-ओ-जाँ हो
अनवर देहलवी
हो रहा है टुकड़े टुकड़े दिल मेरे ग़म-ख़्वार का
अनवर देहलवी
है भी और फिर नज़र नहीं आती
अनवर देहलवी
देखा जो मर्ग तो मरना ज़ियाँ न था
अनवर देहलवी
अब अपना हाल हम उन्हें तहरीर कर चुके
अनवर देहलवी
आँखें दिखाईं ग़ैर को मेरी ख़ता के साथ
अनवर देहलवी
खिला है फूल बहुत रोज़ में मुक़द्दर का
अनवर अंजुम
कब लज़्ज़तों ने ज़ेहन का पीछा नहीं किया
अनवर अंजुम
हुआ करे अगर उस को कोई गिला होगा
अनवर अंजुम
हुआ करे अगर उस को कोई गिला होगा
अनवर अंजुम
ज़ख़्म-ए-नज़ारा ख़ून-ए-नज़र देखते रहो
अनवर मोअज़्ज़म
हमें भूला नहीं अफ़्साना दिल का
अनवर मोअज़्ज़म
ग़म-ए-हबीब ग़म-ए-दो-जहाँ नहीं होता
अनवर मोअज़्ज़म
दीदा-ए-तर ने अजब जल्वागरी देखी है
अनवर मोअज़्ज़म
आओ देखें अहल-ए-वफ़ा की होती है तौक़ीर कहाँ
अनवर मोअज़्ज़म
शहर-दर-शहर फ़ज़ाओं में धुआँ है अब के
अनवर महमूद खालिद
जो हो सका न मिरा उस को भूल जाऊँ मैं
अनवर महमूद खालिद
जो हो सका न मिरा उस को भूल जाऊँ मैं
अनवर महमूद खालिद
अन-कहे लफ़्ज़ों में मतलब ढूँढता रहता हूँ मैं
अनवर महमूद खालिद
अन-कहे लफ़्ज़ों का मतलब ढूँढता रहता हूँ मैं
अनवर महमूद खालिद
जुर्म ठहरा हाल से आगे का नक़्शा देखना
अनसर अली अनसर
हर घर के मकीनों ने ही दर खोले हुए थे
अंजुम तराज़ी
क्या ख़बर थी कि तिरे साथ ये दुनिया होगी
अंजुम सिद्दीक़ी
ग़म सहें या ख़ुशी को प्यार करें
अंजुम सिद्दीक़ी
बा-वफ़ा हूँ मिरी ख़ता है ये
अंजुम सिद्दीक़ी