Hope Poetry (page 173)
किसे जाना कहाँ है मुनहसिर होता है इस पर भी
अखिलेश तिवारी
हँसना रोना पाना खोना मरना जीना पानी पर
अखिलेश तिवारी
ख़ुद नज़ारों पे नज़ारों को हँसी आती है
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
जुनून-ए-इश्क़ का जो कुछ हुआ अंजाम क्या कहिए
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
ये सारी धूल मिरी है ये सब ग़ुबार मिरा
अकबर मासूम
उस ख़ुश-अदा के आइना-ख़ाने में जाऊँगा
अकबर मासूम
ख़्वाब आराम नहीं ख़्वाब परेशानी है
अकबर मासूम
चराग़-ए-राहगुज़र लाख ताबनाक सही
अकबर हैदराबादी
आँख में आँसू का और दिल में लहू का काल है
अकबर हैदराबादी
वारिस
अकबर हैदराबादी
ये कौन मेरी तिश्नगी बढ़ा बढ़ा के चल दिया
अकबर हैदराबादी
जब सुब्ह की दहलीज़ पे बाज़ार लगेगा
अकबर हैदराबादी
घुटन अज़ाब-ए-बदन की न मेरी जान में ला
अकबर हैदराबादी
दहकते कुछ ख़याल हैं अजीब अजीब से
अकबर हैदराबादी
बदन से रिश्ता-ए-जाँ मो'तबर न था मेरा
अकबर हैदराबादी
अता हुई किसे सनद नज़र नज़र की बात है
अकबर हैदराबादी
आँख में आँसू का और दिल में लहू का काल है
अकबर हैदराबादी
दिल है न निशान बे-दिली का
अकबर हुसैन मोहानी इबरत
ज़ोर-ओ-ज़र का ही सिलसिला है यहाँ
अकबर हमीदी
रात आई है बच्चों को पढ़ाने में लगा हूँ
अकबर हमीदी
नाम 'अकबर' तो मिरा माँ की दुआ ने रक्खा
अकबर हमीदी
कहा था उस ने मोहब्बत की आबरू रखना
अकबर हमीदी
काफ़िर था मैं ख़ुदा का न मुंकिर दुआ का था
अकबर हमीदी
हँसी में साग़र-ए-ज़र्रीं खनक खनक जाए
अकबर हमीदी
अभी ज़मीन को हफ़्त आसमाँ बनाना है
अकबर हमीदी
ये सितम इक ख़्वाहिश-ए-मौहूम पर
अकबर हैदरी
क्या कहूँ जज़्बात का तूफ़ान कितना तेज़ है
अकबर हैदरी
किस चमन की ख़ाक में फूलों का मुस्तक़बिल नहीं
अकबर हैदरी
हर नफ़स मिन्नत-कश-ए-आलाम है
अकबर हैदरी
आह ऐ सौदा-ए-ख़ाम-ए-आरज़ू
अकबर हैदरी