Hope Poetry (page 171)

किसे ख़बर जब मैं शहर-ए-जाँ से गुज़र रहा था

अख़्तर होशियारपुरी

ख़्वाहिशें इतनी बढ़ीं इंसान आधा रह गया

अख़्तर होशियारपुरी

हरीफ़-ए-दास्ताँ करना पड़ा है

अख़्तर होशियारपुरी

इक नूर था कि पिछले पहर हम-सफ़र हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

एक हम ही तो नहीं आबला-पा आवारा

अख़्तर होशियारपुरी

दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो

अख़्तर होशियारपुरी

चेहरे के ख़द्द-ओ-ख़ाल में आईने जड़े हैं

अख़्तर होशियारपुरी

अपने क़दमों ही की आवाज़ से चौंका होता

अख़्तर होशियारपुरी

आँधी में चराग़ जल रहे हैं

अख़्तर होशियारपुरी

यूँ ख़ुद को ख़्वाहिशात के अक्सर दिखाए रंग

अख़तर बस्तवी

ज़ुल्म सहते रहे शुक्र करते रहे आई लब तक न ये दास्ताँ आज तक

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ज़िंदगी होगी मिरी ऐ ग़म-ए-दौराँ इक रोज़

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

यूँ बदलती है कहीं बर्क़-ओ-शरर की सूरत

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ये रंग-ओ-कैफ़ कहाँ था शबाब से पहले

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

सहारा दे नहीं सकते शिकस्ता पाँव को

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

रहबर-ए-तब्ल-ओ-निशाँ और ज़रा तेज़ क़दम

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

नहीं आसान तर्क-ए-इश्क़ करना दिल से ग़म जाना

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

नदीम बाग़ में जोश-ए-नुमू की बात न कर

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

न राज़-ए-इब्तिदा समझो न राज़-ए-इंतिहा समझो

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ना जाने क़ाफ़िले पोशीदा किस ग़ुबार में हैं

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

जाम ला जाम कि आलाम से जी डरता है

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

दूर तक रौशनी है ग़ौर से देख

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

रंग ओ बू में डूबे रहते थे हवास

अख़्तर अंसारी

मिला के क़तरा-ए-शबनम में रंग ओ निकहत-ए-गुल

अख़्तर अंसारी

आरज़ू को रूह में ग़म बन के रहना आ गया

अख़्तर अंसारी

ये सनम रिवायत-ओ-नक़्ल के हुबल-ओ-मनात से कम नहीं

अख़्तर अंसारी

ये हसीन फ़ितरत के हुस्न का अनीला-पन

अख़्तर अंसारी

तिरा आसमाँ नावकों का ख़ज़ीना हयात-आफ़रीना हयात-आफ़रीना

अख़्तर अंसारी

सुना के अपने ऐश-ए-ताम की रूदाद के टुकड़े

अख़्तर अंसारी

सदा कुछ ऐसी मिरे गोश-ए-दिल में आती है

अख़्तर अंसारी