Hope Poetry (page 192)

इक धन को एक धन से अलग कर लूँ और गाऊँ

अफ़ज़ाल नवेद

धनक में सर थे तिरी शाल के चुराए हुए

अफ़ज़ाल नवेद

अपने ही तले आई ज़मीनों से निकल कर

अफ़ज़ाल नवेद

आँचल में नज़र आती हैं कुछ और सी आँखें

अफ़ज़ाल नवेद

ये भी शायद ज़िंदगी की इक अदा है दोस्तो

अफ़ज़ल मिनहास

मिटते हुए नुक़ूश-ए-वफ़ा को उभारिए

अफ़ज़ल मिनहास

मैं फ़क़त इस जुर्म में दुनिया में रुस्वा हो गया

अफ़ज़ल मिनहास

मैं अपने दिल में नई ख़्वाहिशें सजाए हुए

अफ़ज़ल मिनहास

लोग हँसने के लिए रोते हैं अक्सर दहर में

अफ़ज़ल मिनहास

काँच की ज़ंजीर टूटी तो सदा भी आएगी

अफ़ज़ल मिनहास

जो शख़्स भी मिला है वो इक ज़िंदा लाश है

अफ़ज़ल मिनहास

चुप रहे तो शहर की हंगामा आराई मिली

अफ़ज़ल मिनहास

किसी ने ख़्वाब में आकर मुझे ये हुक्म दिया

अफ़ज़ल ख़ान

इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद

अफ़ज़ल ख़ान

शिकस्त-ए-ज़िंदगी वैसे भी मौत ही है ना

अफ़ज़ल ख़ान

राह भोला हूँ मगर ये मिरी ख़ामी तो नहीं

अफ़ज़ल ख़ान

कल अपने शहर की बस में सवार होते हुए

अफ़ज़ल ख़ान

ये कैसे ख़्वाब की ख़्वाहिश में घर से निकला हूँ

अफ़ज़ल गौहर राव

तू परिंदों की तरह उड़ने की ख़्वाहिश छोड़ दे

अफ़ज़ल गौहर राव

ज़मीं से आगे भला जाना था कहाँ मैं ने

अफ़ज़ल गौहर राव

शिकस्त खा के भी कब हौसले हैं कम मेरे

अफ़ज़ल गौहर राव

मैं सुन रहा हूँ जो दुनिया सुना रही है मुझे

अफ़ज़ल गौहर राव

मैं अपनी ज़ात में जब से सितारा होने लगा

अफ़ज़ल गौहर राव

देर तक कोई किसी से बद-गुमाँ रहता नहीं

अफ़ज़ल गौहर राव

गुज़रे तअ'ल्लुक़ात का अब वास्ता न दे

अफ़ज़ल अलवी

यूँ इलाज-ए-दिल बीमार किया जाएगा

अफ़ज़ल इलाहाबादी

ये हक़ीक़त है वो कमज़ोर हुआ करती हैं

अफ़ज़ल इलाहाबादी

ये बता दे मुझ को मेरे दिल किसे आवाज़ दूँ

अफ़ज़ल इलाहाबादी

तुम हमारे हो हम तुम्हारे हैं

अफ़ज़ल इलाहाबादी

तेरे जल्वों को रू-ब-रू कर के

अफ़ज़ल इलाहाबादी