Hope Poetry (page 190)
मैं हर्फ़-ए-इब्तिदा हूँ
आग़ाज़ बरनी
दूर से क्या मुस्कुरा कर देखना
आग़ाज़ बरनी
अगर कुछ ए'तिबार-ए-जिस्म-ओ-जाँ हो
आग़ाज़ बरनी
चलेगा नहीं मुझ पे फ़ुक़रा तुम्हारा
आग़ा शायर
तुम कहाँ वस्ल कहाँ वस्ल की उम्मीद कहाँ
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
उर्यां ही रहे लाश ग़रीब-उल-वतनी में
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
उन्स अपने में कहीं पाया न बेगाने में था
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
रोने से जो भड़ास थी दिल की निकल गई
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
जब्र को इख़्तियार कौन करे
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
गिरी गिर कर उठी पलटी तो जो कुछ था उठा लाई
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
बहार आई है फिर चमन में नसीम इठला के चल रही है
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
गर एक शब भी वस्ल की लज़्ज़त न पाए दिल
आग़ा मोहम्मद तक़ी
ये खुले खुले से गेसू इन्हें लाख तू सँवारे
आग़ा हश्र काश्मीरी
सब कुछ ख़ुदा से माँग लिया तुझ को माँग कर
आग़ा हश्र काश्मीरी
गो हवा-ए-गुलसिताँ ने मिरे दिल की लाज रख ली
आग़ा हश्र काश्मीरी
गो हरम के रास्ते से वो पहुँच गए ख़ुदा तक
आग़ा हश्र काश्मीरी
याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं
आग़ा हश्र काश्मीरी
तुम और फ़रेब खाओ बयान-ए-रक़ीब से
आग़ा हश्र काश्मीरी
सू-ए-मय-कदा न जाते तो कुछ और बात होती
आग़ा हश्र काश्मीरी
चोरी कहीं खुले न नसीम-ए-बहार की
आग़ा हश्र काश्मीरी
मूजिद जो नूर का है वो मेरा चराग़ है
आग़ा हज्जू शरफ़
लिक्खा है जो तक़दीर में होगा वही ऐ दिल
आग़ा हज्जू शरफ़
ख़ल्वत-सरा-ए-यार में पहुँचेगा क्या कोई
आग़ा हज्जू शरफ़
बे-वफ़ा तुम बा-वफ़ा मैं देखिए होता है क्या
आग़ा हज्जू शरफ़
वो रंगत तू ने ऐ गुल-रू निकाली
आग़ा हज्जू शरफ़
उड़ कर सुराग़-ए-कूचा-ए-दिलबर लगाइए
आग़ा हज्जू शरफ़
तीर-ए-नज़र से छिद के दिल-अफ़गार ही रहा
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरछी नज़र न हो तरफ़-ए-दिल तो क्या करूँ
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरी हवस में जो दिल से पूछा निकल के घर से किधर को चलिए
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरी गली में जो धूनी रमाए बैठे हैं
आग़ा हज्जू शरफ़