Hope Poetry (page 189)
चारागरों ने बाँध दिया मुझ को बख़्त से
अहमद फ़क़ीह
हमराज़-ए-रक़ीब हो गए हो
अहमद अज़ीमाबादी
बाज़ार की फ़सील भी रुख़्सार पर मले
अहमद अज़ीमाबादी
बाज़ार-ए-आरज़ू में कटी जा रही है उम्र
अहमद अज़ीम
क़र्या-ए-इंतिज़ार में उम्र गँवा के आए हैं
अहमद अज़ीम
इसी लिए तो हार का हुआ नहीं मलाल तक
अहमद अज़ीम
इश्क़ में हो के मुब्तिला दिल ने कमाल कर दिया
अहमद अज़ीम
फ़ित्ना उठा तो रज़्म-गह-ए-ख़ाक से उठा
अहमद अज़ीम
ऐसी भी कहाँ बे-सर-ओ-सामानी हुई है
अहमद अज़ीम
ऐसा इलाज-ए-हब्स-ए-दिल-ए-ज़ार चाहिए
अहमद अज़ीम
अब सोचिए तो दाम-ए-तमन्ना में आ गए
अहमद अज़ीम
ये मिरा वहम तो कुछ और सुना जाता है
अहमद अता
वो ज़माना है कि अब कुछ नहीं दीवाने में
अहमद अता
मैं तिरी मानता लेकिन जो मिरा दिल है ना
अहमद अता
ख़्वाब का इज़्न था ता'बीर-ए-इजाज़त थी मुझे
अहमद अता
कल ख़्वाब में इक परी मिली थी
अहमद अता
हमारा इश्क़ सलामत है यानी हम अभी हैं
अहमद अता
इक अश्क बहा होगा
अहमद अता
तर्क-ए-उल्फ़त के ब'अद भी 'अश्फ़ाक़'
अहमद अशफ़ाक़
वो मिरी जुराअत-ए-कमयाब से ना-वाक़िफ़ हैं
अहमद अशफ़ाक़
सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से
अहमद अशफ़ाक़
हम तिरे इश्क़ में कुछ ऐसे ठिकाने लग जाएँ
अहमद अशफ़ाक़
दे के वो सारे इख़्तियार मुझे
अहमद अशफ़ाक़
उस ने किया है वादा-ए-फ़र्दा आने दो उस को आए तो
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
तख़्ता-ए-मश्क़-ए-सितम मुझ को बनाने वाला
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
मैं सोज़-ए-दरूँ अपना दिखा भी नहीं सकता
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
कौन है किस का ये पैग़ाम है क्या अर्ज़ करूँ
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
कर के असीर-ए-ग़म्ज़ा-ओ-नाज़-ओ-अदा मुझे
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
अम्न-ओ-सुल्ह-ओ-आश्ती हो जैसे बीमारी का नाम
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
आवाज़ का उस की ज़ेर-ओ-बम कुछ याद रहा कुछ भूल गए
अहमद अली बर्क़ी आज़मी