Hope Poetry (page 191)
तिरे वास्ते जान पे खेलेंगे हम ये समाई है दिल में ख़ुदा की क़सम
आग़ा हज्जू शरफ़
तेरे आलम का यार क्या कहना
आग़ा हज्जू शरफ़
सन्नाटे का आलम क़ब्र में है है ख़्वाब-ए-अदम आराम नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
सलफ़ से लोग उन पे मर रहे हैं हमेशा जानें लिया करेंगे
आग़ा हज्जू शरफ़
रुलवा के मुझ को यार गुनहगार कर नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
रंग जिन के मिट गए हैं उन में यार आने को है
आग़ा हज्जू शरफ़
रहा करते हैं यूँ उश्शाक़ तेरी याद ओ हसरत में
आग़ा हज्जू शरफ़
नाहक़ ओ हक़ का उन्हें ख़ौफ़-ओ-ख़तर कुछ भी नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
लुटाते हैं वो बाग़-ए-इश्क़ जाए जिस का जी चाहे
आग़ा हज्जू शरफ़
किस के हाथों बिक गया किस के ख़रीदारों में हूँ
आग़ा हज्जू शरफ़
ख़ुदा-मालूम किस की चाँद से तस्वीर मिट्टी की
आग़ा हज्जू शरफ़
जो सामना भी कभी यार-ए-ख़ूब-रू से हुआ
आग़ा हज्जू शरफ़
जवानी आई मुराद पर जब उमंग जाती रही बशर की
आग़ा हज्जू शरफ़
जश्न था ऐश-ओ-तरब की इंतिहा थी मैं न था
आग़ा हज्जू शरफ़
जब से हुआ है इश्क़ तिरे इस्म-ए-ज़ात का
आग़ा हज्जू शरफ़
इश्क़-ए-दहन में गुज़री है क्या कुछ न पूछिए
आग़ा हज्जू शरफ़
हुए ऐसे ब-दिल तिरे शेफ़्ता हम दिल-ओ-जाँ को हमेशा निसार किया
आग़ा हज्जू शरफ़
हुआ है तौर-ए-बर्बादी जो बे-दस्तूर पहलू में
आग़ा हज्जू शरफ़
हवस गुलज़ार की मिस्ल-ए-अनादिल हम भी रखते थे
आग़ा हज्जू शरफ़
घिसते घिसते पाँव में ज़ंजीर आधी रह गई
आग़ा हज्जू शरफ़
दिल को लटका लिया है गेसू में
आग़ा हज्जू शरफ़
दिल को अफ़सोस-ए-जवानी है जवानी अब कहाँ
आग़ा हज्जू शरफ़
दरपेश अजल है गंज-ए-शहीदाँ ख़रिदिए
आग़ा हज्जू शरफ़
चाहिएँ मुझ को नहीं ज़र्रीं क़फ़स की पुतलियाँ
आग़ा हज्जू शरफ़
बुलबुल का दिल ख़िज़ाँ के सदमे से हिल रहा है
आग़ा हज्जू शरफ़
आग लगा दी पहले गुलों ने बाग़ में वो शादाबी की
आग़ा हज्जू शरफ़
लैला सर-ब-गरेबाँ है मजनूँ सा आशिक़-ए-ज़ार कहाँ
अफ़ज़ल परवेज़
गर्द उड़े या कोई आँधी ही चले
अफ़ज़ल परवेज़
ख़ाली हुआ गिलास नशा सर में आ गया
अफ़ज़ाल नवेद
जंग से जंगल बना जंगल से मैं निकला नहीं
अफ़ज़ाल नवेद