Hope Poetry (page 193)

मिरी दीवानगी की हद न पूछो तुम कहाँ तक है

अफ़ज़ल इलाहाबादी

लुटा रहा हूँ मैं लाल-ओ-गुहर अँधेरे में

अफ़ज़ल इलाहाबादी

जो मिरी आरज़ू नहीं करता

अफ़ज़ल इलाहाबादी

हर नग़मा-ए-पुर-दर्द हर इक साज़ से पहले

अफ़ज़ल इलाहाबादी

बुलंदी से कभी वो आश्नाई कर नहीं सकता

अफ़ज़ल इलाहाबादी

उसे अजब था ग़ुरूर-ए-शगुफ़्त-ए-रुख़्सारी

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

मोहब्बत

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

क्या आग सब से अच्छी ख़रीदार है

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

अगर उन्हें मालूम हो जाए

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

रौशन वो दिल पे मेरे दिल-आज़ार से हुआ

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

कुछ और रंग मैं तरतीब-ए-ख़ुश्क-ओ-तर करता

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

कोई न हर्फ़-ए-नवेद-ओ-ख़बर कहा उस ने

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

गिरा तो गिर के सर-ए-ख़ाक-ए-इब्तिज़ाल आया

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

इक शाम ये सफ़्फ़ाक ओ बद-अंदेश जला दे

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

दुआ की राख पे मरमर का इत्र-दाँ उस का

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

बहुत न हौसला-ए-इज़्ज़-ओ-जाह मुझ से हुआ

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

वापसी

आफ़ताब शम्सी

पहली तारीख़

आफ़ताब शम्सी

हिजरत

आफ़ताब शम्सी

सभी बिछड़ गए मुझ से गुज़रते पल की तरह

आफ़ताब शम्सी

मेरे गले से आन के प्यारा जो फिर लगे

आफ़ताब शाह आलम सानी

ये हिजरतें हैं ज़मीन ओ ज़माँ से आगे की

आफ़ताब इक़बाल शमीम

मुंकिर का ख़ौफ़

आफ़ताब इक़बाल शमीम

ये पेड़ ये पहाड़ ज़मीं की उमंग हैं

आफ़ताब इक़बाल शमीम

रिज़्क़ का जब नादारों पर दरवाज़ा बंद हुआ

आफ़ताब इक़बाल शमीम

नज़र के सामने रहना नज़र नहीं आना

आफ़ताब इक़बाल शमीम

नस्लें जो अँधेरे के महाज़ों पे लड़ी हैं

आफ़ताब इक़बाल शमीम

कहीं सोता न रह जाऊँ सदा दे कर जगाओ ना

आफ़ताब इक़बाल शमीम

जब वो इक़रार-ए-आश्नाई करे

आफ़ताब इक़बाल शमीम

वो यूँ मिला था कि जैसे कभी न बिछड़ेगा

आफ़ताब हुसैन