Hope Poetry (page 28)

जल्वे तिरे जो रौनक़-ए-बाज़ार हो गए

हसन बरेलवी

हर सुख़न में वो सेहर करते हैं

हसन बरेलवी

हाल-ए-मर्ग-ए-बे-कसी सुन कर असर कोई न हो

हसन बरेलवी

चश्म-ए-जुनूँ में हुस्न-ए-सलासिल है बे-क़रार

हसन बख़्त

शुआ-ए-ज़र न मिली रंग-ए-शाइराना मिला

हसन अज़ीज़

कमाँ उठाओ कि हैं सामने निशाने बहुत

हसन अज़ीज़

देखूँ वो करती है अब के अलम-आराई कि मैं

हसन अज़ीज़

अजीब हाल है सहरा-नशीं हैं घर वाले

हसन अज़ीज़

फ़िक्र-ए-मंज़िल है न नाम-ए-रहनुमा लेते हैं हम

हसन अज़ीमाबादी

ये रात काश इसी दिलकशी से ढलती रहे

हसन अख्तर जलील

ये रात काश इसी दिलकशी से ढलती रहे

हसन अख्तर जलील

सीने में चराग़ जल रहा है

हसन अख्तर जलील

निभाओ अब उसे जो वज़्अ भी बना ली है

हसन अख्तर जलील

ख़ला के दश्त में ये तुर्फ़ा माजरा भी है

हसन अख्तर जलील

इक भयानक तीरगी है रौशनी ऐ रौशनी

हसन अख्तर जलील

दिल की तरफ़ निगाह-ए-तग़ाफ़ुल रहा करे

हसन अख्तर जलील

आरज़ू की हमा-हामी और मैं

हसन अख्तर जलील

रंग-ए-सियाह के नाम एक नज़्म

हसन अकबर कमाल

मशरिक़ी लड़कियों के नाम एक नज़्म

हसन अकबर कमाल

ऐ फ़ैरी-टेल

हसन अकबर कमाल

उस इक उम्मीद को तो राहत-ए-सफ़र न समझ

हसन अकबर कमाल

सफ़्फ़ाक सराब से ज़ियादा

हसन अकबर कमाल

क्या होता है ख़िज़ाँ बहार के आने जाने से

हसन अकबर कमाल

हुनर जो तालिब-ए-ज़र हो हुनर नहीं रहता

हसन अकबर कमाल

दुख उठाओ कितने ही घर बहार करने में

हसन अकबर कमाल

सब उम्मीदें मिरे आशोब-ए-तमन्ना तक थीं

हसन आबिदी

उम्मीद का बाब लिख रहा हूँ

हसन आबिदी

सुब्ह आँख खुलती है एक दिन निकलता है

हसन आबिदी

शहर-ए-ना-पुरसाँ में कुछ अपना पता मिलता नहीं

हसन आबिदी

दिल की दहलीज़ पे जब शाम का साया उतरा

हसन आबिदी