Hope Poetry (page 27)

न मेरे ख़्वाब को पैकर न ख़द्द-ओ-ख़ाल दिया

हसन नईम

मुझ को कोई भी सिला मिलने में दुश्वारी न थी

हसन नईम

मैं किस वरक़ को छुपाऊँ दिखाऊँ कौन सा बाब

हसन नईम

कुछ उसूलों का नशा था कुछ मुक़द्दस ख़्वाब थे

हसन नईम

ख़्वाब की राह में आए न दर-ओ-बाम कभी

हसन नईम

ख़याल-ओ-ख़्वाब में कब तक ये गुफ़्तुगू होगी

हसन नईम

ख़ैर से दिल को तिरी याद से कुछ काम तो है

हसन नईम

जो ग़म के शो'लों से बुझ गए थे हम उन के दाग़ों का हार लाए

हसन नईम

जंगलों की ये मुहिम है रख़्त-ए-जाँ कोई नहीं

हसन नईम

इश्क़ के बाब में किरदार हूँ दीवाने का

हसन नईम

गया वो ख़्वाब-ए-हक़ीक़त को रू-ब-रू कर के

हसन नईम

दिल वो किश्त-ए-आरज़ू था जिस की पैमाइश न की

हसन नईम

बिछ्ड़ें तो शहर भर में किसी को पता न हो

हसन नईम

बयान-ए-शौक़ बना हर्फ़-ए-इज़्तिराब बना

हसन नईम

बसर हो यूँ कि हर इक दर्द हादिसा न लगे

हसन नईम

आरज़ू थी कि तिरा दहर भी शोहरा होवे

हसन नईम

आँखों से टपके ओस तो जाँ में नमी रहे

हसन नईम

मंज़र में अगर कुछ भी दिखाई नहीं देगा

हसन नासिर

कोई ग़मगीं कोई ख़ुश हो कर सदा देता रहा

हसन नज्मी सिकन्दरपुरी

अहल-ए-हवस के हाथों न ये कारोबार हो

हसन नज्मी सिकन्दरपुरी

आइनों से पहले भी रस्म-ए-ख़ुद-नुमाई थी

हसन नज्मी सिकन्दरपुरी

आइने से न डरो अपना सरापा देखो

हसन नज्मी सिकन्दरपुरी

झुलसे बदन न सुलगें आँखें ऐसे हैं दिन-रात मिरे

हसन कमाल

अपनी वज्ह-ए-बर्बादी जानते हैं हम लेकिन क्या करें बयाँ लोगो

हसन कमाल

ये रौशनी यूँही आग़ोश में नहीं आती

हसन जमील

तिलिस्म-ए-आतिश-ए-ग़म आज़माने वाला हो

हसन जमील

तारीख़ की अदालत

हसन हमीदी

किस के चेहरे से उठ गया पर्दा

हसन बरेलवी

कहा जब तुम से चारा दर्द-ए-दिल का हो नहीं सकता

हसन बरेलवी

जल्वे तिरे जो रौनक़-ए-बाज़ार हो गए

हसन बरेलवी