Hope Poetry (page 29)
वो ब'अद-ए-मुद्दत मिला तो रोने की आरज़ू में
हसन अब्बासी
उदास शामों बुझे दरीचों में लौट आया
हसन अब्बासी
सुनहरे ख़्वाब आँखों में बुना करते थे हम दोनों
हसन अब्बासी
कभी जो आँखों के आ गया आफ़्ताब आगे
हसन अब्बासी
आँखों से ख़्वाब दिल से तमन्ना तमाम-शुद
हसन अब्बास रज़ा
शाएरी पूरा मर्द और पूरी औरत माँगती है
हसन अब्बास रज़ा
आसार-ए-क़दीमा से निकला एक नविश्ता
हसन अब्बास रज़ा
सीने की ख़ानक़ाह में आने नहीं दिया
हसन अब्बास रज़ा
शब की शब महफ़िल में कोई ख़ुश-कलाम आया तो क्या
हसन अब्बास रज़ा
न आरज़ुओं का चाँद चमका न क़ुर्बतों के गुलाब महके
हसन अब्बास रज़ा
इरादा था कि अब के रंग-ए-दुनिया देखना है
हसन अब्बास रज़ा
हम परियों के चाहने वाले ख़्वाब में देखें परियाँ
हसन अब्बास रज़ा
हमें तो ख़्वाहिश-ए-दुनिया ने रुस्वा कर दिया है
हसन अब्बास रज़ा
गुलाब-ए-सुर्ख़ से आरास्ता दालान करना है
हसन अब्बास रज़ा
घर लौटते हैं जब भी कोई यार गँवा कर
हसन अब्बास रज़ा
आँखों से ख़्वाब दिल से तमन्ना तमाम-शुद
हसन अब्बास रज़ा
शहर में शोर है उस शोख़ के आ जाने का
हसन आबिद
मुझे किसी से किसी बात का गिला ही नहीं
हसन आबिद
कुछ अजीब आलम है होश है न मस्ती है
हसन आबिद
ख़ुद को पाने की जुस्तुजू है वही
हसन आबिद
गुल हुए चाक-गरेबाँ सर-ए-गुलज़ार ऐ दिल
हसन आबिद
हसरत भरी नज़र से वो देखता है मुझ को
हार्श बरहम भट
रज़िया-सुल्ताना कोरंगी, ''के'' एरिया
हारिस ख़लीक़
ज़िंदगी अब रहे ख़ता कब तक
हरी मेहता
ग़म-ज़दा ज़िंदगी रही न रही
हरी मेहता
जिन्हें हासिल है तेरा क़ुर्ब ख़ुश-क़िस्मत सही लेकिन
हरी चंद अख़्तर
भरोसा किस क़दर है तुझ को 'अख़्तर' उस की रहमत पर
हरी चंद अख़्तर
सुना कर हाल क़िस्मत आज़मा कर लौट आए हैं
हरी चंद अख़्तर
मिलेगी शैख़ को जन्नत, हमें दोज़ख़ अता होगा
हरी चंद अख़्तर
कलियों का तबस्सुम हो, कि तुम हो कि सबा हो
हरी चंद अख़्तर