Hope Poetry (page 31)
एहसास-ए-ना-रसाई से जिस दम उदास था
हनीफ़ तरीन
दिल गिराँ-बारी-ए-वहशत में जिधर जाता है
हनीफ़ तरीन
नसीम-ए-सुब्ह-ए-बहार आए दिल-ए-हज़ीं को क़रार आए
हनीफ़ फ़ौक़
मिरी हयात अगर मुज़्दा-ए-सहर भी नहीं
हनीफ़ फ़ौक़
क्या नज़र की हुश्यारी ख़ुद-असीर-ए-मस्ती है
हनीफ़ फ़ौक़
फ़ज़ाओं में कुछ ऐसी खलबली थी
हनीफ़ फ़ौक़
दिल-ए-नादाँ पे शिकायत का गुमाँ क्या होगा
हनीफ़ फ़ौक़
पत्थरों से कब तलक बाँधेगी उम्मीद-ए-वफ़ा
हनीफ़ साजिद
जल्वा-गर सोचों में हैं कुछ आगही के आफ़्ताब
हनीफ़ साजिद
कुशूद-ए-कार की ख़ातिर ख़ुदा बदलते रहे
हनीफ़ नज्मी
जो इस ज़मीं से कभी फिर नुमू करूँगा मैं
हनीफ़ नज्मी
शब-ए-दराज़ का है क़िस्सा मुख़्तसर 'कैफ़ी'
हनीफ़ कैफ़ी
मिले वो लम्हा जिसे अपना कह सकें 'कैफ़ी'
हनीफ़ कैफ़ी
हर इक कमाल को देखा जो हम ने रू ब-ज़वाल
हनीफ़ कैफ़ी
बना के तोड़ती है दाएरे चराग़ की लौ
हनीफ़ कैफ़ी
मैं जो अपने हाल से कट गया तो कई ज़मानों में बट गया
हनीफ़ असअदी
अभी न जाओ अभी रास्ते सजे भी नहीं
हनीफ़ असअदी
शामिल हुए हैं बज़्म में मिस्ल-ए-चराग़ हम
हनीफ़ अख़गर
आँखों में जल रहे थे दिए ए'तिबार के
हनीफ़ अख़गर
यादों का शहर-ए-दिल में चराग़ाँ नहीं रहा
हनीफ़ अख़गर
वो मुझे सोज़-ए-तमन्ना की तपिश समझा गया
हनीफ़ अख़गर
वो दिल में और क़रीब-ए-रग-ए-गुलू भी मिले
हनीफ़ अख़गर
तुम ख़ुद ही मोहब्बत की हर इक बात भुला दो
हनीफ़ अख़गर
संग बरसेंगे और मुस्कुराएँगे हम
हनीफ़ अख़गर
जल्वों का जो तेरे कोई प्यासा नज़र आया
हनीफ़ अख़गर
इस तरह मह-रुख़ों को पशेमाँ करेंगे हम
हनीफ़ अख़गर
इस तरह अहद-ए-तमन्ना को गुज़ारे जाइए
हनीफ़ अख़गर
दिल की मिरे बिसात क्या एक दिया बुझा हुआ
हनीफ़ अख़गर
देखना ये इश्क़ में हुस्न-ए-पज़ीराई के रंग
हनीफ़ अख़गर
अज़्म-ए-सफ़र से पहले भी और ख़त्म-ए-सफ़र से आगे भी
हनीफ़ अख़गर