Love Poetry (page 185)
हिजाब दूर तुम्हारा शबाब कर देगा
बेख़ुद देहलवी
हज़रत-ए-दिल ये इश्क़ है दर्द से कसमसाए क्यूँ
बेख़ुद देहलवी
हर एक बात तिरी बे-सबात कितनी है
बेख़ुद देहलवी
दोनों ही की जानिब से हो गर अहद-ए-वफ़ा हो
बेख़ुद देहलवी
दिल है मुश्ताक़ जुदा आँख तलबगार जुदा
बेख़ुद देहलवी
दिल चुरा ले गई दुज़्दीदा-नज़र देख लिया
बेख़ुद देहलवी
दे मोहब्बत तो मोहब्बत में असर पैदा कर
बेख़ुद देहलवी
बेवफ़ा कहने से क्या वो बेवफ़ा हो जाएगा
बेख़ुद देहलवी
बेताब रहें हिज्र में कुछ दिल तो नहीं हम
बेख़ुद देहलवी
बेचने आए कोई क्या दिल-ए-शैदा ले कर
बेख़ुद देहलवी
बज़्म-ए-दुश्मन में बुलाते हो ये क्या करते हो
बेख़ुद देहलवी
बनी थी दिल पे कुछ ऐसी की इज़्तिराब न था
बेख़ुद देहलवी
बात करने की शब-ए-वस्ल इजाज़त दे दो
बेख़ुद देहलवी
और साक़ी पिला अभी क्या है
बेख़ुद देहलवी
ऐसा बना दिया तुझे क़ुदरत ख़ुदा की है
बेख़ुद देहलवी
अदू को देख के जब वो इधर को देखते हैं
बेख़ुद देहलवी
आशिक़ समझ रहे हैं मुझे दिल लगी से आप
बेख़ुद देहलवी
आशिक़ हैं मगर इश्क़ नुमायाँ नहीं रखते
बेख़ुद देहलवी
हासिल उस मह-लक़ा की दीद नहीं
बेखुद बदायुनी
यूँही रहा जो बुतों पर निसार दिल मेरा
बेखुद बदायुनी
शिकवा सुन कर जो मिज़ाज-ए-बुत-ए-बद-ख़ू बदला
बेखुद बदायुनी
नाले में कभी असर न आया
बेखुद बदायुनी
क्यूँ मैं अब क़ाबिल-ए-जफ़ा न रहा
बेखुद बदायुनी
हासिल उस मह-लक़ा की दीद नहीं
बेखुद बदायुनी
हश्र पर वा'दा-ए-दीदार है किस का तेरा
बेखुद बदायुनी
हैं वस्ल में शोख़ी से पाबंद-ए-हया आँखें
बेखुद बदायुनी
दर्द-ए-दिल में कमी न हो जाए
बेखुद बदायुनी
आह करना दिल-ए-हज़ीं न कहीं
बेखुद बदायुनी
इश्क़-विश्क़ ये चाहत-वाहत मन का भुलावा फिर मन भी अपना क्या
बेकल उत्साही
हवा-ए-इश्क़ ने भी गुल खिलाए हैं क्या क्या
बेकल उत्साही