Love Poetry (page 186)

हर एक लहज़ा मिरी धड़कनों में चुभती थी

बेकल उत्साही

उधर वो हाथों के पत्थर बदलते रहते हैं

बेकल उत्साही

उदास काग़ज़ी मौसम में रंग ओ बू रख दे

बेकल उत्साही

तंज़ की तेग़ मुझी पर सभी खींचे होंगे

बेकल उत्साही

तमन्ना बन गई है माया-ए-इल्ज़ाम क्या होगा

बेकल उत्साही

रहीन-ए-आस रही है न महव-ए-यास रही

बेकल उत्साही

नज़र की फ़त्ह कभी क़ल्ब की शिकस्त लगे

बेकल उत्साही

नए ज़माने में अब ये कमाल होने लगा

बेकल उत्साही

मुझ को शिकस्तगी का क़लक़ देर तक रहा

बेकल उत्साही

ख़ुद अपने जुर्म का मुजरिम को ए'तिराफ़ न था

बेकल उत्साही

हम चटानों की तरह साहिल पे ढाले जाएँगे

बेकल उत्साही

भीतर बसने वाला ख़ुद बाहर की सैर करे मौला ख़ैर करे

बेकल उत्साही

ज़िंदा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं

बहज़ाद लखनवी

इश्क़ का एजाज़ सज्दों में निहाँ रखता हूँ मैं

बहज़ाद लखनवी

तुम याद मुझे आ जाते हो

बहज़ाद लखनवी

तुम से शिकायत क्या करूँ

बहज़ाद लखनवी

यूँ तो जो चाहे यहाँ साहब-ए-महफ़िल हो जाए

बहज़ाद लखनवी

उन को बुत समझा था या उन को ख़ुदा समझा था मैं

बहज़ाद लखनवी

तुम्हारे हुस्न की तस्ख़ीर आम होती है

बहज़ाद लखनवी

तुझ पर मिरी मोहब्बत क़ुर्बान हो न जाए

बहज़ाद लखनवी

तिरे इश्क़ में ज़िंदगानी लुटा दी

बहज़ाद लखनवी

मोहब्बत मुस्तक़िल कैफ़-आफ़रीं मालूम होती है

बहज़ाद लखनवी

मसरूर भी हूँ ख़ुश भी हूँ लेकिन ख़ुशी नहीं

बहज़ाद लखनवी

लब पे है फ़रियाद अश्कों की रवानी हो चुकी

बहज़ाद लखनवी

क्या ये भी मैं बतला दूँ तू कौन है मैं क्या हूँ

बहज़ाद लखनवी

ख़ुशी महसूस करता हूँ न ग़म महसूस करता हूँ

बहज़ाद लखनवी

ख़ुदा को ढूँड रहा था कहीं ख़ुदा न मिला

बहज़ाद लखनवी

है ख़िरद-मंदी यही बा-होश दीवाना रहे

बहज़ाद लखनवी

फ़रियाद है अब लब पर जब अश्क-फ़िशानी थी

बहज़ाद लखनवी

इक बे-वफ़ा को प्यार किया हाए क्या किया

बहज़ाद लखनवी