Love Poetry (page 194)

मिरी नज़र में ख़ाक तेरे आइने पे गर्द है

बशीर बद्र

मेरी आँखों में तिरे प्यार का आँसू आए

बशीर बद्र

मेरे सीने पर वो सर रक्खे हुए सोता रहा

बशीर बद्र

मेरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे

बशीर बद्र

मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा

बशीर बद्र

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में

बशीर बद्र

कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ

बशीर बद्र

कोई लश्कर कि धड़कते हुए ग़म आते हैं

बशीर बद्र

किसी की याद में पलकें ज़रा भिगो लेते

बशीर बद्र

ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में

बशीर बद्र

ख़ून पत्तों पे जमा हो जैसे

बशीर बद्र

ख़ानदानी रिश्तों में अक्सर रक़ाबत है बहुत

बशीर बद्र

कौन आया रास्ते आईना-ख़ाने हो गए

बशीर बद्र

कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई

बशीर बद्र

कहाँ आँसुओं की ये सौग़ात होगी

बशीर बद्र

कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो

बशीर बद्र

कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते

बशीर बद्र

जब तक निगार-ए-दाश्त का सीना दुखा न था

बशीर बद्र

जब सहर चुप हो हँसा लो हम को

बशीर बद्र

जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है

बशीर बद्र

होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते

बशीर बद्र

हमारे पास तो आओ बड़ा अंधेरा है

बशीर बद्र

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए

बशीर बद्र

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है

बशीर बद्र

फ़लक से चाँद सितारों से जाम लेना है

बशीर बद्र

इक परी के साथ मौजों पर टहलता रात को

बशीर बद्र

दुआ करो कि ये पौदा सदा हरा ही लगे

बशीर बद्र

दिल में इक तस्वीर छुपी थी आन बसी है आँखों में

बशीर बद्र

चमक रही है परों में उड़ान की ख़ुशबू

बशीर बद्र

चाय की प्याली में नीली टेबलेट घोली

बशीर बद्र