Love Poetry (page 195)
भीगी हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा
बशीर बद्र
बड़े ताजिरों की सताई हुई
बशीर बद्र
अज़्मतें सब तिरी ख़ुदाई की
बशीर बद्र
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
बशीर बद्र
अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
बशीर बद्र
आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
बशीर बद्र
जल्वों का उन के दिल को तलब-गार कर दिया
बशीरुद्दीन राज़
हुई मुद्दतें ऐ दिल-ए-हज़ीं न पयाम है न सलाम है
बशीरुद्दीन राज़
दिल जो उम्मीद-वार होता है
बशीरुद्दीन राज़
ज़ख़्म खा के ख़ंदाँ हैं पैरहन-दरीदा हम
बशीर मुंज़िर
सोए हुए जज़्बों को जगा कर फिर वो शाम न आई
बशीर मुंज़िर
क्या बिछड़ कर रह गया जाने भरी बरसात में
बशीर मुंज़िर
हम बयाबानों में घूमे शहर की सड़कों पे टहले
बशीर मुंज़िर
होगा क्या चाँद-नगर सोचते हैं
बशीर मुंज़िर
दम-ब-ख़ुद है चाँदनी चुप-चाप हैं अश्जार भी
बशीर मुंज़िर
कैसी कैसी थीं उन्ही गलियों में ज़ेबा सूरतें
बशीर अहमद बशीर
जी नहीं लगता किताबों में किताबें क्या करें
बशीर अहमद बशीर
हर गाम पे आवारगी-ओ-दर-ब-दरी में
बशीर अहमद बशीर
इक बे-सबात अक्स बना बे-निशाँ गया
बशीर अहमद बशीर
दूर तक चारों तरफ़ मेरे सिवा कोई न था
बशीर अहमद बशीर
ऐसा तह-ए-अफ़्लाक ख़राबा नहीं कोई
बशीर अहमद बशीर
वही है रंग मगर बू है कुछ लहू जैसी
बशर नवाज़
प्यार के बंधन ख़ून के रिश्ते टूट गए ख़्वाबों की तरह
बशर नवाज़
विसाल
बशर नवाज़
तो ऐसा क्यूँ नहीं करते
बशर नवाज़
क़र्ज़
बशर नवाज़
पता नहीं वो कौन था
बशर नवाज़
मुझे कहना है
बशर नवाज़
मुझे जीना नहीं आता
बशर नवाज़
करोगे याद तो हर बात याद आएगी
बशर नवाज़