Love Poetry (page 192)

तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है

बशीर बद्र

तुम मोहब्बत को खेल कहते हो

बशीर बद्र

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ

बशीर बद्र

सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें

बशीर बद्र

प्यार ही प्यार है सब लोग बराबर हैं यहाँ

बशीर बद्र

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे

बशीर बद्र

पहली बार नज़रों ने चाँद बोलते देखा

बशीर बद्र

नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं

बशीर बद्र

मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है

बशीर बद्र

मोहब्बत अदावत वफ़ा बे-रुख़ी

बशीर बद्र

मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा

बशीर बद्र

मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देना

बशीर बद्र

मैं हर हाल में मुस्कुराता रहूँगा

बशीर बद्र

महलों में हम ने कितने सितारे सजा दिए

बशीर बद्र

महक रही है ज़मीं चाँदनी के फूलों से

बशीर बद्र

कोई बादल हो तो थम जाए मगर अश्क मिरे

बशीर बद्र

कितनी सच्चाई से मुझ से ज़िंदगी ने कह दिया

बशीर बद्र

काग़ज़ में दब के मर गए कीड़े किताब के

बशीर बद्र

कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो

बशीर बद्र

कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए

बशीर बद्र

जिस दिन से चला हूँ मिरी मंज़िल पे नज़र है

बशीर बद्र

इस शहर के बादल तिरी ज़ुल्फ़ों की तरह हैं

बशीर बद्र

हयात आज भी कनीज़ है हुज़ूर-ए-जब्र में

बशीर बद्र

हाथ में चाँद जहाँ आया मुक़द्दर चमका

बशीर बद्र

हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं

बशीर बद्र

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है

बशीर बद्र

चाँद सा मिस्रा अकेला है मिरे काग़ज़ पर

बशीर बद्र

बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम

बशीर बद्र

बहुत दिनों से है दिल अपना ख़ाली ख़ाली सा

बशीर बद्र

अहबाब भी ग़ैरों की अदा सीख गए हैं

बशीर बद्र