Love Poetry (page 284)
अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा
अमजद इस्लाम अमजद
अगरचे कोई भी अंधा नहीं था
अमजद इस्लाम अमजद
आँखों से इक ख़्वाब गुज़रने वाला है
अमजद इस्लाम अमजद
आईनों में अक्स न हों तो हैरत रहती है
अमजद इस्लाम अमजद
झोलियाँ सब की भरती जाती हैं
अमजद हैदराबादी
ढूँडती हैं जिसे मिरी आँखें
अमजद हैदराबादी
यूँ तो क्या क्या नज़र नहीं आता
अमजद हैदराबादी
नज़्म
अमीताभ बच्चन
ये लगता है अब भी कहीं कुछ बचा है
अमित शर्मा मीत
सुनो यार इस की घुटन कुछ नहीं है
अमित शर्मा मीत
क़िस्मत अपनी ऐसी कच्ची निकली है
अमित शर्मा मीत
नज़र भर के यूँ जो मुझे देखता है
अमित शर्मा मीत
मुझ को पाने के सिवा और तमन्ना क्या है
अमित शर्मा मीत
माज़ी के जब ज़ख़्म उभरने लगते हैं
अमित शर्मा मीत
मैं केवल अब ख़ुद से रिश्ता रक्खूँगा
अमित शर्मा मीत
ग़रज़ पड़ने पे उस से माँगता है
अमित शर्मा मीत
इक तरफ़ प्यार है रिश्ता है वफ़ादारी है
अमित शर्मा मीत
अपनी आँखों को कभी ठीक से धोया ही नहीं
अमित शर्मा मीत
अपने हिस्से की अना दूँ तो अना दूँ किस को
अमित शर्मा मीत
जगमगा उट्ठा है रंग मंच
अमित गुप्ता
एहसास
अमित गुप्ता
ज़िंदगी बे-क़रार कौन करे
अमित अहद
ख़ुदा की कौन सी है राह बेहतर जानता है
अमित अहद
ज़माने से निराला है उरूस-ए-फ़िक्र का जौबन
अमीरुल्लाह तस्लीम
हम ने पाला मुद्दतों पहलू में हम कोई नहीं
अमीरुल्लाह तस्लीम
फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ
अमीरुल्लाह तस्लीम
दिमाग़ दे जो ख़ुदा गुलशन-ए-मोहब्बत में
अमीरुल्लाह तस्लीम
दिल धड़कता है शब-ए-ग़म में कहीं ऐसा न हो
अमीरुल्लाह तस्लीम
वस्ल में बिगड़े बने यार के अक्सर गेसू
अमीरुल्लाह तस्लीम
वस्ल की शब भी अदा-ए-रस्म-ए-हिरमाँ में रहा
अमीरुल्लाह तस्लीम