Love Poetry (page 283)
तारा तारा उतर रही है रात समुंदर में
अमजद इस्लाम अमजद
सोच के गुम्बद में उभरी टूटती यादों की गूँज
अमजद इस्लाम अमजद
साए ढलने चराग़ जलने लगे
अमजद इस्लाम अमजद
सदियाँ जिन में ज़िंदा हों वो सच भी मरने लगते हैं
अमजद इस्लाम अमजद
पसपा हुई सिपाह तो परचम भी हम ही थे
अमजद इस्लाम अमजद
पर्दे में लाख फिर भी नुमूदार कौन है
अमजद इस्लाम अमजद
पर्दे में इस बदन के छुपें राज़ किस तरह
अमजद इस्लाम अमजद
पलकों की दहलीज़ पे चमका एक सितारा था
अमजद इस्लाम अमजद
न आसमाँ से न दुश्मन के ज़ोर ओ ज़र से हुआ
अमजद इस्लाम अमजद
लहू में तैरते फिरते मलाल से कुछ हैं
अमजद इस्लाम अमजद
लहू में रंग लहराने लगे हैं
अमजद इस्लाम अमजद
कितनी सरकश भी हो सर-फिरी ये हवा रखना रौशन दिया
अमजद इस्लाम अमजद
किसी की आँख में ख़ुद को तलाश करना है
अमजद इस्लाम अमजद
खेल उस ने दिखा के जादू के
अमजद इस्लाम अमजद
कमाल-ए-हुस्न है हुस्न-ए-कमाल से बाहर
अमजद इस्लाम अमजद
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
अमजद इस्लाम अमजद
कभी रक़्स-ए-शाम-ए-बहार में उसे देखते
अमजद इस्लाम अमजद
कब से हम लोग इस भँवर में हैं
अमजद इस्लाम अमजद
जो दिन था एक मुसीबत तो रात भारी थी
अमजद इस्लाम अमजद
जब भी आँखों में तिरे वस्ल का लम्हा चमका
अमजद इस्लाम अमजद
हुज़ूर-ए-यार में हर्फ़ इल्तिजा के रक्खे थे
अमजद इस्लाम अमजद
ग़ुबार-ए-दश्त-ए-तलब में हैं रफ़्तगाँ क्या क्या
अमजद इस्लाम अमजद
एक आज़ार हुई जाती है शोहरत हम को
अमजद इस्लाम अमजद
दूरियाँ सिमटने में देर कुछ तो लगती है
अमजद इस्लाम अमजद
दश्त-ए-दिल में सराब ताज़ा हैं
अमजद इस्लाम अमजद
दश्त-ए-बे-आब की तरह गुज़री
अमजद इस्लाम अमजद
दर-ए-काएनात जो वा करे उसी आगही की तलाश है
अमजद इस्लाम अमजद
दाम-ए-ख़ुशबू में गिरफ़्तार सबा है कब से
अमजद इस्लाम अमजद
चेहरे पे मिरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन
अमजद इस्लाम अमजद
भीड़ में इक अजनबी का सामना अच्छा लगा
अमजद इस्लाम अमजद