Love Poetry (page 285)
थक गए तुम हसरत-ए-ज़ौक़-ए-शहादत कम नहीं
अमीरुल्लाह तस्लीम
शमीम-ए-यार न जब तक चमन में छू आए
अमीरुल्लाह तस्लीम
क्यूँ ख़राबात में लाफ़-ए-हमा-दानी वाइ'ज़
अमीरुल्लाह तस्लीम
करो न देर जहाँ में जहाँ से आगे चलो
अमीरुल्लाह तस्लीम
कल मिरा था आज वो बुत ग़ैर का होने लगा
अमीरुल्लाह तस्लीम
ग़ैब से सहरा-नवरदों का मुदावा हो गया
अमीरुल्लाह तस्लीम
फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ
अमीरुल्लाह तस्लीम
इक आफ़त-ए-जाँ है जो मुदावा मिरे दिल का
अमीरुल्लाह तस्लीम
चाहता हूँ पहले ख़ुद-बीनी से मौत आए मुझे
अमीरुल्लाह तस्लीम
भूले से भी न जानिब-ए-अग़्यार देखना
अमीरुल्लाह तस्लीम
ज़ाहिरन तोड़ लिया हम ने बुतों से रिश्ता
आमिर उस्मानी
ये क़दम क़दम बलाएँ ये सवाद-ए-कू-ए-जानाँ
आमिर उस्मानी
मिरी ज़िंदगी का हासिल तिरे ग़म की पासदारी
आमिर उस्मानी
इश्क़ सर-ता-ब-क़दम आतिश-ए-सोज़ाँ है मगर
आमिर उस्मानी
इश्क़ के मराहिल में वो भी वक़्त आता है
आमिर उस्मानी
हमें आख़िरत में 'आमिर' वही उम्र काम आई
आमिर उस्मानी
आबलों का शिकवा क्या ठोकरों का ग़म कैसा
आमिर उस्मानी
सुर्ख़ सितारा
आमिर उस्मानी
ख़्वाब जो बिखर गए
आमिर उस्मानी
इल्तिजा
आमिर उस्मानी
थी सियाहियों का मस्कन मिरी ज़िंदगी की वादी
आमिर उस्मानी
न सकत है ज़ब्त-ए-ग़म की न मजाल-ए-अश्क-बारी
आमिर उस्मानी
लौटे कुछ इस तरह तिरी जल्वा-सरा से हम
आमिर उस्मानी
इश्क़ के मराहिल में वो भी वक़्त आता है
आमिर उस्मानी
ग़म-ए-बेहद में किस को ज़ब्त का मक़्दूर होता है
आमिर उस्मानी
दिल पे वो वक़्त भी किस दर्जा गिराँ होता है
आमिर उस्मानी
दर्द बढ़ता गया जितने दरमाँ किए प्यास बढ़ती गई जितने आँसू पिए
आमिर उस्मानी
मुझ को ख़ामोशी-ए-हालात से डर लगता है
आमिर रियाज़
मैं ने तूफ़ान से पहले का इशारा देखा
आमिर रियाज़
ज़मीं के जिस्म पे यूँ यूरिश-ए-क़ज़ा कब तक
आमिर नज़र