Love Poetry (page 287)

ख़ुश-आमदीद कहता गुलों का जहान था

अमीर हम्ज़ा साक़िब

ख़याल-ए-यार का सिक्का उछालने में गया

अमीर हम्ज़ा साक़िब

हैरान बहुत ताबिश-ए-हुस्न-दीगराँ थी

अमीर हम्ज़ा साक़िब

दश्त-ए-बला-ए-शौक़ में ख़ेमे लगाए हैं

अमीर हम्ज़ा साक़िब

ज़िंदगी अपना सफ़र तय तो करेगी लेकिन

अमीता परसुराम 'मीता'

न हों ख़्वाहिशें न गिला कोई न जफ़ा कोई

अमीता परसुराम 'मीता'

कुछ तो एहसास-ए-मोहब्बत से हुईं नम आँखें

अमीता परसुराम 'मीता'

ज़िंदगी अपना सफ़र तय तो करेगी लेकिन

अमीता परसुराम 'मीता'

सुब्ह-ए-रौशन को अंधेरों से भरी शाम न दे

अमीता परसुराम 'मीता'

शिद्दत-ए-शौक़ से अफ़्साने तो हो जाते हैं

अमीता परसुराम 'मीता'

रक़ीब-ए-जाँ नज़र का नूर हो जाए तो क्या कीजे

अमीता परसुराम 'मीता'

न तो ख़ौफ़ रोज़-ए-जज़ा का हो वही इश्क़ है

अमीता परसुराम 'मीता'

खींच लाया तुझे एहसास-ए-तहफ़्फ़ुज़ मुझ तक

अमीता परसुराम 'मीता'

कम्बख़्त दिल ने इश्क़ को वहशत बना दिया

अमीता परसुराम 'मीता'

हज़ारों मंज़िलें फिर भी मिरी मंज़िल है तू ही तू

अमीता परसुराम 'मीता'

बन गए दिल के फ़साने क्या क्या

अमीता परसुराम 'मीता'

किया करते हैं दिलदारी दिल-आज़ारी नहीं करते

अमीरुल इस्लाम हाशमी

कोई ले ज़ोर की चुटकी तो है इंकार पोशीदा

अमीरुल इस्लाम हाशमी

हया गिरती हुई दीवार थी कल शब जहाँ मैं था

अमीरुल इस्लाम हाशमी

इक छोड़ो हो इक और जो मिस मात करो हो

अमीरुल इस्लाम हाशमी

ज़िंदगी की दौड़ में पीछे न था

अमीर क़ज़लबाश

ज़िंदगी और हैं कितने तिरे चेहरे ये बता

अमीर क़ज़लबाश

यार क्या ज़िंदगी है सूरज की

अमीर क़ज़लबाश

क़त्ल हो तो मेरा सा मौत हो तो मेरी सी

अमीर क़ज़लबाश

मैं क्या जानूँ घरों का हाल क्या है

अमीर क़ज़लबाश

होना पड़ा है ख़ूगर-ए-ग़म भी ख़ुशी की ख़ैर

अमीर क़ज़लबाश

आइने से नज़र चुराते हैं

अमीर क़ज़लबाश

उन की बे-रुख़ी में भी इल्तिफ़ात शामिल है

अमीर क़ज़लबाश

सुब्ह तक मैं सोचता हूँ शाम से

अमीर क़ज़लबाश

पाईं हर एक राह-गुज़र पर उदासियाँ

अमीर क़ज़लबाश