Love Poetry (page 289)
हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
अमीर मीनाई
है जवानी ख़ुद जवानी का सिंगार
अमीर मीनाई
देख ले बुलबुल ओ परवाना की बेताबी को
अमीर मीनाई
बोसा लिया जो उस लब-ए-शीरीं का मर गए
अमीर मीनाई
आँखें दिखलाते हो जोबन तो दिखाओ साहब
अमीर मीनाई
आहों से सोज़-ए-इश्क़ मिटाया न जाएगा
अमीर मीनाई
आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन
अमीर मीनाई
या-रब शब-ए-विसाल ये कैसा गजर बजा
अमीर मीनाई
वस्ल की शब भी ख़फ़ा वो बुत-ए-मग़रूर रहा
अमीर मीनाई
वादा-ए-वस्ल और वो कुछ बात है
अमीर मीनाई
उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ
अमीर मीनाई
तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है
अमीर मीनाई
तिरा क्या काम अब दिल में ग़म-ए-जानाना आता है
अमीर मीनाई
शमशीर है सिनाँ है किसे दूँ किसे न दूँ
अमीर मीनाई
सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
अमीर मीनाई
साफ़ कहते हो मगर कुछ नहीं खुलता कहना
अमीर मीनाई
क़िबला-ए-दिल काबा-ए-जाँ और है
अमीर मीनाई
पूछा न जाएगा जो वतन से निकल गया
अमीर मीनाई
पिला साक़िया अर्ग़वानी शराब
अमीर मीनाई
न बेवफ़ाई का डर था न ग़म जुदाई का
अमीर मीनाई
मुझ मस्त को मय की बू बहुत है
अमीर मीनाई
मैं रो के आह करूँगा जहाँ रहे न रहे
अमीर मीनाई
क्या रोके क़ज़ा के वार तावीज़
अमीर मीनाई
कुछ ख़ार ही नहीं मिरे दामन के यार हैं
अमीर मीनाई
जब से बुलबुल तू ने दो तिनके लिए
अमीर मीनाई
जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का
अमीर मीनाई
हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
अमीर मीनाई
हम-सर-ए-ज़ुल्फ़ क़द-ए-हूर-ए-शमाइल ठहरा
अमीर मीनाई
हैं न ज़िंदों में न मुर्दों में कमर के आशिक़
अमीर मीनाई
है ख़मोशी ज़ुल्म-ए-चर्ख़-ए-देव-पैकर का जवाब
अमीर मीनाई