Love Poetry (page 288)

नज़र नज़र हैरानी दे

अमीर क़ज़लबाश

नज़र में हर दुश्वारी रख

अमीर क़ज़लबाश

नज़र आने से पहले डर रहा हूँ

अमीर क़ज़लबाश

नक़्श पानी पे बना हो जैसे

अमीर क़ज़लबाश

न पूछ मंज़र-ए-शाम-ओ-सहर पे क्या गुज़री

अमीर क़ज़लबाश

लोग बनते हैं होशियार बहुत

अमीर क़ज़लबाश

क्या ख़रीदोगे चार आने में

अमीर क़ज़लबाश

ख़ौफ़ बन कर ये ख़याल आता है अक्सर मुझ को

अमीर क़ज़लबाश

कहीं सलीब कहीं कर्बला नज़र आए

अमीर क़ज़लबाश

हर रहगुज़र में काहकशाँ छोड़ जाऊँगा

अमीर क़ज़लबाश

हाँ ये तौफ़ीक़ कभी मुझ को ख़ुदा देता था

अमीर क़ज़लबाश

फ़िक्र-ए-ग़ुर्बत है न अंदेशा-ए-तन्हाई है

अमीर क़ज़लबाश

इक परिंदा अभी उड़ान में है

अमीर क़ज़लबाश

दिल में बे-नाम सी ख़ुशी है अभी

अमीर क़ज़लबाश

दर्द का शहर कहीं कर्ब का सहरा होगा

अमीर क़ज़लबाश

बसर होना बहुत दुश्वार सा है

अमीर क़ज़लबाश

बनते हैं फ़रज़ाने लोग

अमीर क़ज़लबाश

अपने हमराह ख़ुद चला करना

अमीर क़ज़लबाश

अगर मस्जिद से वाइज़ आ रहे हैं

अमीर क़ज़लबाश

आँखें खुली हुई हैं तो मंज़र भी आएगा

अमीर क़ज़लबाश

आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह

अमीर क़ज़लबाश

उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो

अमीर मीनाई

तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा

अमीर मीनाई

किस ढिटाई से वो दिल छीन के कहते हैं 'अमीर'

अमीर मीनाई

ख़ुश्क सेरों तन-ए-शाएर का लहू होता है

अमीर मीनाई

कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं

अमीर मीनाई

काबा-ए-रुख़ की तरफ़ पढ़नी है आँखों से नमाज़

अमीर मीनाई

जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा

अमीर मीनाई

इन शोख़ हसीनों पे जो माइल नहीं होता

अमीर मीनाई

हिलाल ओ बद्र दोनों में 'अमीर' उन की तजल्ली है

अमीर मीनाई