Love Poetry (page 291)

मौत मेरी जान मौत

अमीक़ हनफ़ी

ला-परवाही

अमीक़ हनफ़ी

खेती

अमीक़ हनफ़ी

जंगल: एक हश्त पहलू तस्वीर

अमीक़ हनफ़ी

जंगल

अमीक़ हनफ़ी

हाए शिद्दत की कमी

अमीक़ हनफ़ी

एक ख़्वाहिश

अमीक़ हनफ़ी

दुआ की शाख़ पर

अमीक़ हनफ़ी

दुआ

अमीक़ हनफ़ी

बम्बई रात समुंदर

अमीक़ हनफ़ी

अंधेरे में सोचने की मश्क़

अमीक़ हनफ़ी

ऐ अज़ल से....

अमीक़ हनफ़ी

आईना-ख़ाने के क़ैदी से

अमीक़ हनफ़ी

आए बसंत

अमीक़ हनफ़ी

सावन आया छाने लगे घोर घन घोर बादल

अमीक़ हनफ़ी

फूल खिले हैं लिखा हुआ है तोड़ो मत

अमीक़ हनफ़ी

मैं भी कब से चुप बैठा हूँ वो भी कब से चुप बैठी है

अमीक़ हनफ़ी

कौन है ये मतला-ए-तख़ईल पर महताब सा

अमीक़ हनफ़ी

दिल है वीरान बयाबाँ की तरह

अमीक़ हनफ़ी

बीन हवा के हाथों में है लहरे जादू वाले हैं

अमीक़ हनफ़ी

अर्ज़-ए-मुद्दआ करते क्यूँ नहीं किया हम ने

अमीक़ हनफ़ी

'अमीक़' छेड़ ग़ज़ल ग़म की इंतिहा कब है

अमीक़ हनफ़ी

अक्सर रात गए तक मैं चौखट पर बैठा रहता हूँ

अमीक़ हनफ़ी

ऐनक के दोनों शीशे ही अटे हुए थे धूल में

अमीक़ हनफ़ी

ज़िंदगी एक सज़ा हो जैसे

अमीन राहत चुग़ताई

तीरगी ही तीरगी है बाम-ओ-दर में कौन है

अमीन राहत चुग़ताई

रोज़ जो मरता है इस को आदमी लिक्खो कभी

अमीन राहत चुग़ताई

मंज़िल-ए-शम्स-ओ-क़मर से गुज़रे

अमीन राहत चुग़ताई

किसी मकाँ के दरीचे को वा तो होना था

अमीन राहत चुग़ताई

जो मय-कदे से भी दामन बचा बचा के चले

अमीन राहत चुग़ताई