Love Poetry (page 292)
जरस-ए-मय ने पुकारा है उठो और सुनो
अमीन राहत चुग़ताई
हमीं थे जान-ए-बहाराँ हमीं थे रंग-ए-तरब
अमीन राहत चुग़ताई
देख कोह-ए-ना-रसा बन कर भरम रक्खा तिरा
अमीन राहत चुग़ताई
आज वो फूल बना हुस्न-ए-दिल-आरा देखा
अमीन राहत चुग़ताई
यूँ दिल है सर-ब-सज्दा किसी के हुज़ूर में
अमीन हज़ीं
नुमूद-ए-रंग-ओ-बू ने मार डाला
अमीन हज़ीं
लाले पड़े हैं जान के जीने का एहतिमाम कर
अमीन हज़ीं
अफ़्साना-ए-हयात को दोहरा रहा हूँ मैं
अमीन हज़ीं
उस ने जो ग़म किए हवाले थे
अमीन अडीराई
रख दिया मैं ने दर-ए-हुस्न पे हारा हुआ इश्क़
अमीन अडीराई
क़िस्सा-ए-ख़ाक तो कुछ ख़ाक से आगे तक था
अमीन अडीराई
इक अश्क सर-ए-शोख़ी-ए-रुख़सार में गुम है
अमीन अडीराई
हिजाब-ए-अब्र रुख़-ए-महताब से छलका
अम्बर वसीम इलाहाबादी
मेरा ख़त लिख के बुलाना उसे अच्छा न लगा
अम्बर वसीम इलाहाबादी
हैराँ मैं पहली बार हुआ ज़िंदगी में कल
अम्बर वसीम इलाहाबादी
फूल जैसी है कभी ये ख़ार की मानिंद है
अम्बर जोशी
इस से पहले कि कुछ बोला जाए
अम्बर जोशी
ग़म-ए-उल्फ़त में डूबे थे उभरना भी ज़रूरी था
अम्बर जोशी
दिल की हर बात तिरी मुझ को बता देती है
अम्बर जोशी
वहशत
अम्बरीन सलाहुद्दीन
'क़ुर्रतुल-ऐन-हैदर'
अम्बरीन सलाहुद्दीन
खिड़की
अम्बरीन सलाहुद्दीन
जहाँ मैं खड़ी थी
अम्बरीन सलाहुद्दीन
इंतिसाब
अम्बरीन सलाहुद्दीन
दस्तरस
अम्बरीन सलाहुद्दीन
रस्ता रोकती ख़ामोशी ने कौन सी बात सुनानी है
अम्बरीन सलाहुद्दीन
मिरी आँखों में मंज़र धुल रहा था
अम्बरीन सलाहुद्दीन
क्यूँ अम्बर की पहनाई में चुप की राह टटोलें
अम्बरीन सलाहुद्दीन
हम सितारों में तिरा अक्स ना ढलने देंगे
अम्बरीन सलाहुद्दीन
चाँद उभरेगा तो फिर हश्र दिखाई देगा
अम्बरीन सलाहुद्दीन