Love Poetry (page 334)

जाने किस चाह के किस प्यार के गुन गाते हो

ऐतबार साजिद

घर की दहलीज़ से बाज़ार में मत आ जाना

ऐतबार साजिद

दिल हैं यूँ मुज़्तरिब मकानों में

ऐतबार साजिद

ढूँडते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी

ऐतबार साजिद

धड़कन धड़कन यादों की बारात अकेला कमरा

ऐतबार साजिद

छोटे छोटे कई बे-फ़ैज़ मफ़ादात के साथ

ऐतबार साजिद

बंदे ज़मीन और आसमाँ सरमा की शब कहानियाँ

ऐतबार साजिद

बंद दरीचे सूनी गलियाँ अन-देखे अनजाने लोग

ऐतबार साजिद

बहुत सजाए थे आँखों में ख़्वाब मैं ने भी

ऐतबार साजिद

आँखों से अयाँ ज़ख़्म की गहराई तो अब है

ऐतबार साजिद

तू ही इंसाफ़ से कह जिस का ख़फ़ा यार रहे

ऐश देहलवी

फूल अल्लाह ने बनाए हैं महकने के लिए

ऐश देहलवी

मेरा शिकवा तिरी महफ़िल में अदू करते हैं

ऐश देहलवी

मैं बुरा ही सही भला न सही

ऐश देहलवी

क्या हुए आशिक़ उस शकर-लब के

ऐश देहलवी

कुछ कम नहीं हैं शम्अ से दिल की लगन में हम

ऐश देहलवी

किसी की नेक हो या बद जहाँ में ख़ू नहीं छुपती

ऐश देहलवी

जुरअत ऐ दिल मय ओ मीना है वो ख़ुद-काम भी है

ऐश देहलवी

जो होता आह तिरी आह-ए-बे-असर में असर

ऐश देहलवी

जिस दिल में तिरी ज़ुल्फ़ का सौदा नहीं होता

ऐश देहलवी

दोस्त जब दिल सा आश्ना ही नहीं

ऐश देहलवी

आशिक़ों को ऐ फ़लक देवेगा तू आज़ार क्या

ऐश देहलवी

ज़ुल्मतों में गो ठहरने को ठहर जाते हैं लोग

ऐश बर्नी

हर इक शय पर बहार-ए-ज़िंदगी महसूस करता हूँ

ऐश बर्नी

ज़ेहन पर जब दर्द ख़ामोशी की चादर तानता है

ऐनुद्दीन आज़िम

यही इक जिस्म-ए-फ़ानी जावेदानी का अहाता करने वाला है

ऐनुद्दीन आज़िम

सुर्ख़-रू सब को सर-ए-मक़्तल नज़र आने लगे

ऐनुद्दीन आज़िम

सताइश न कीजिए तबर्रा सही

ऐनुद्दीन आज़िम

पाँव फँसे में हाथ छुड़ाने आया था

ऐनुद्दीन आज़िम

पढ़ो इबारत-ए-तख़्लीक़-ए-दर्द चेहरे पर

ऐनुद्दीन आज़िम