Love Poetry (page 375)

ये नहीं कि तू ने भेजा ही नहीं पयाम कोई

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

तमाम उम्र ख़ुशी की तलाश में गुज़री

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

लोग चुन लें जिस की तहरीरें हवालों के लिए

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

गुलशन में न हम होंगे तो फिर सोग हमारा

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

तज्दीद-ए-रिवायात-ए-कुहन करते रहेंगे

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

क़फ़स से छुटने पे शाद थे हम कि लज़्ज़त-ए-ज़िंदगी मिलेगी

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

नई सुब्ह चाहते हैं नई शाम चाहते हैं

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

हर एहतिमाम है दो दिन की ज़िंदगी के लिए

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

गया तो हुस्न न दीवार में न दर में था

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

बे-ख़ुद भी हैं होशियार भी हैं देखने वाले

अबुल कलाम आज़ाद

क्यूँ असीर-ए-गेसू-ए-ख़म-दार-ए-क़ातिल हो गया

अबुल कलाम आज़ाद

इन शोख़ हसीनों की अदा और ही कुछ है

अबुल कलाम आज़ाद

बे-नियाज़-ए-दहर कर देता है इश्क़

अबुल हसनात हक़्क़ी

तमाम हिज्र उसी का विसाल है उस का

अबुल हसनात हक़्क़ी

शिकस्त-ए-अहद पर इस के सिवा बहाना भी क्या

अबुल हसनात हक़्क़ी

शब को हर रंग में सैलाब तुम्हारा देखें

अबुल हसनात हक़्क़ी

फूल का या संग का इज़हार कर

अबुल हसनात हक़्क़ी

नक़्श-ए-यक़ीं तिरा वजूद-ए-वहम बुझा गुमाँ बुझा

अबुल हसनात हक़्क़ी

बे-नियाज़-ए-दहर कर देता है इश्क़

अबुल हसनात हक़्क़ी

बे-नियाज़ दहर कर देता है इश्क़

अबुल हसनात हक़्क़ी

ज़ब्त कर आह बार बार न कर

अबू ज़ाहिद सय्यद यहया हुसैनी क़द्र

मुश्किल है पता चलना क़िस्सों से मोहब्बत का

अबू ज़ाहिद सय्यद यहया हुसैनी क़द्र

कोह-ए-ग़म से क्या ग़रज़ फ़िक्र-ए-बुताँ से क्या ग़रज़

अबू ज़ाहिद सय्यद यहया हुसैनी क़द्र

है आम अज़ल ही से फ़ैज़ान मोहब्बत का

अबू ज़ाहिद सय्यद यहया हुसैनी क़द्र

ये बंदगी का सदा अब समाँ रहे न रहे

अबु मोहम्मद वासिल

तसव्वुरात में इन को बुला के देख लिया

अबु मोहम्मद वासिल

रह-ए-वफ़ा में उन्हीं की ख़ुशी की बात करो

अबु मोहम्मद वासिल

मसरूर हो रहे हैं ग़म-ए-आशिक़ी से हम

अबु मोहम्मद वासिल

कारवाँ इश्क़ की मंज़िल के क़रीं आ पहूँचा

अबु मोहम्मद वासिल

जबीन-ए-शौक़ पर कोई हुआ है मेहरबाँ शायद

अबु मोहम्मद वासिल