Love Poetry (page 377)

तिरा हर उज़्व प्यारे ख़ुश-नुमा है उज़्व-ए-दीगर सीं

आबरू शाह मुबारक

ख़ुदावंदा करम कर फ़ज़्ल कर अहवाल पर मेरे

आबरू शाह मुबारक

इश्क़ की सफ़ मनीं नमाज़ी सब

आबरू शाह मुबारक

इश्क़ का तीर दिल में लागा है

आबरू शाह मुबारक

फ़ानी-ए-इश्क़ कूँ तहक़ीक़ कि हस्ती है कुफ़्र

आबरू शाह मुबारक

आज यारों को मुबारक हो कि सुब्ह-ए-ईद है

आबरू शाह मुबारक

ये तिरी दुश्नाम के पीछे हँसी गुलज़ार सी

आबरू शाह मुबारक

ये सब्ज़ा और ये आब-ए-रवाँ और अब्र ये गहरा

आबरू शाह मुबारक

ये बाव क्या फिरी कि तिरी लट पलट गई

आबरू शाह मुबारक

याद-ए-ख़ुदा कर बंदे यूँ नाहक़ उम्र कूँ खोना क्या

आबरू शाह मुबारक

उस ज़ुल्फ़-ए-जाँ कूँ सनम की बला कहो

आबरू शाह मुबारक

तुम्हारी जब सीं आई हैं सजन दुखने को लाल अँखियाँ

आबरू शाह मुबारक

तुम्हारे लोग कहते हैं कमर है

आबरू शाह मुबारक

तूफ़ाँ है शैख़ क़हरिया है

आबरू शाह मुबारक

तीरा-रंगों के हुआ हक़ में ये तप करना दवा

आबरू शाह मुबारक

शौक़ बढ़ता है मिरे दिल का दिल-अफ़गारों के बीच

आबरू शाह मुबारक

शब-ए-सियाह हुआ रोज़ ऐ सजन तुझ बिन

आबरू शाह मुबारक

सरसों लगा के पाँव तलक दिल हुआ हूँ मैं

आबरू शाह मुबारक

साँप सर मार अगर जो जावे मर

आबरू शाह मुबारक

सैर-ए-बहार-ए-हुस्न ही अँखियों का काम जान

आबरू शाह मुबारक

रता है अबरुवाँ पर हाथ अक्सर लावबाली का

आबरू शाह मुबारक

रखे कोई इस तरह के लालची को कब तलक बहला

आबरू शाह मुबारक

क़यामत राग ज़ालिम भाव काफ़िर गत है ऐ पन्ना

आबरू शाह मुबारक

पलंग कूँ छोड़ ख़ाली गोद सीं जब उठ गया मीता

आबरू शाह मुबारक

निपट ये माजरा यारो कड़ा है

आबरू शाह मुबारक

निगह तेरी का इक ज़ख़्मी न तन्हा दिल हमारा है

आबरू शाह मुबारक

नाज़नीं जब ख़िराम करते हैं

आबरू शाह मुबारक

नालाँ हुआ है जल कर सीने में मन हमारा

आबरू शाह मुबारक

मोहब्बत सेहर है यारो अगर हासिल हो यक-रूई

आबरू शाह मुबारक

मत मेहर सेती हाथ में ले दिल हमारे कूँ

आबरू शाह मुबारक