Love Poetry (page 379)

इलाही क्या कभी पूरे ये अरमाँ हो भी सकते हैं

अबरार शाहजहाँपुरी

कहीं भी राह-नुमा अब नज़र नहीं आता

अबरार किरतपुरी

नुमायाँ जब वो अपने ज़ेहन की तस्वीर करता है

अबरार किरतपुरी

नई हवा में कोई रंग-ए-काएनात में गुम

अबरार किरतपुरी

बाग़बाँ जश्न-ए-बहाराँ नहीं होने देते

अबरार किरतपुरी

शाम से मिलने गया तो रात ने ठहरा लिया

अबरार हामिद

क्या क्या धरे अजूबे हैं शहर-ए-ख़याल में

अबरार हामिद

ख़ुशी के वक़्त भी तुझ को मलाल कैसा है

अबरार हामिद

ख़ुश-बख़्त हैं आज़ाद हैं जो अपने सुख़न में

अबरार हामिद

दिए की लौ से न जल जाए तीरगी शब की

अबरार हामिद

बिफरी लहरें रात अँधेरी और बला की आँधी है

अबरार हामिद

भड़क उठा है अलाव तुम्हारी फ़ुर्क़त का

अबरार हामिद

अगर तू साथ चल पड़ता सफ़र आसान हो जाता

अबरार हामिद

ख़ुशनुमा दीवार-ओ-दर के ख़्वाब ही देखा किए

अबरार आज़मी

गुम-शुदा

अबरार आज़मी

एक वाक़िआ

अबरार आज़मी

ज़मीं पे आग फ़लक पर धुआँ दिखाई दिया

अबरार आज़मी

उस ने कल भागते लम्हों को पकड़ रक्खा था

अबरार आज़मी

तुम्हारी बज़्म में जिस बात का भी चर्चा था

अबरार आज़मी

किस का है जुर्म किस की ख़ता सोचना पड़ा

अबरार आज़मी

कमरे में धुआँ दर्द की पहचान बना था

अबरार आज़मी

धूप चमकी रात की तस्वीर पीली हो गई

अबरार आज़मी

बहुत तज़्किरा दास्तानों में था

अबरार आज़मी

ये दाग़-ए-इश्क़ जो मिटता भी है चमकता भी है

अबरार अहमद

जो भी यकजा है बिखरता नज़र आता है मुझे

अबरार अहमद

हम यक़ीनन यहाँ नहीं होंगे

अबरार अहमद

ज़िंदा आदमी से कलाम

अबरार अहमद

क़स्बाती लड़कों का गीत

अबरार अहमद

पिछले पहर की दस्तक

अबरार अहमद

मिट्टी थी किस जगह की

अबरार अहमद