Love Poetry (page 380)
मिट्टी से एक मुकालिमा
अबरार अहमद
मेरे पास क्या कुछ नहीं
अबरार अहमद
मजीद-अमजद के लिए
अबरार अहमद
कहीं टूटते हैं
अबरार अहमद
हवा जब तेज़ चलती है
अबरार अहमद
हवा हर इक सम्त बह रही है
अबरार अहमद
हमारे दुखों का इलाज कहाँ है
अबरार अहमद
दवाम-ए-वस्ल का ख़्वाब
अबरार अहमद
बारिश
अबरार अहमद
आँखें तरस गई हैं
अबरार अहमद
ये यक़ीं ये गुमाँ ही मुमकिन है
अबरार अहमद
ये रह-ए-इश्क़ है इस राह पे गर जाएगा तू
अबरार अहमद
यक़ीन है कि गुमाँ है मुझे नहीं मालूम
अबरार अहमद
तुझ से वाबस्तगी रहेगी अभी
अबरार अहमद
क़िस्से से तिरे मेरी कहानी से ज़ियादा
अबरार अहमद
क्या जानिए क्या है हद-ए-इदराक से आगे
अबरार अहमद
कुछ काम नहीं है यहाँ वहशत के बराबर
अबरार अहमद
कोई सोचे न हमें कोई पुकारा न करे
अबरार अहमद
कहीं पर सुब्ह रखता हूँ कहीं पर शाम रखता हूँ
अबरार अहमद
जो भी यकजा है बिखरता नज़र आता है मुझे
अबरार अहमद
हमें ख़बर नहीं कुछ कौन है कहाँ कोई है
अबरार अहमद
यज़ीद-ए-वक़्त ने अब के लगाई है क़दग़न
आबिद वदूद
सब अपने अपने तरीक़े से भीक माँगते हैं
आबिद वदूद
हम फ़क़ीरों का पैरहन है धूप
आबिद वदूद
अब क़फ़स और गुलिस्ताँ में कोई फ़र्क़ नहीं
आबिद वदूद
तेरी दुनिया की कज-अदाई से
आबिद वदूद
न घर सुकून-कदा है न कारख़ाना-ए-इश्क़
आबिद वदूद
जब से दरिया में है तुग़्यानी बहुत
आबिद वदूद
हाथ में माहताब हो जैसे
आबिद वदूद
अपने अंदर भी हम-नवाई नहीं
आबिद वदूद