Love Poetry (page 382)

श्याम गोकुल न जाना कि राधा का जी अब न बंसी की तानों पे लहराएगा

आबिद हशरी

न कर्ब-ए-हिज्र न कैफ़्फ़ियत-ए-विसाल में हूँ

आबिद हशरी

रात

आबिद आलमी

वो इक निगाह जो ख़ामोश सी है बरसों से

आबिद आलमी

जो कहते हैं किधर दीवानगी है

आबिद अख़्तर

ये इम्तियाज़ ज़रूरी है अब इबादत में

अभिषेक शुक्ला

मैं सोचता हूँ बहुत ज़िंदगी के बारे में

अभिषेक शुक्ला

सफ़र के बा'द भी ज़ौक़-ए-सफ़र न रह जाए

अभिषेक शुक्ला

लहर का ख़्वाब हो के देखते हैं

अभिषेक शुक्ला

ख़ला के जैसा कोई दरमियान भी पड़ता

अभिषेक शुक्ला

हम ऐसे सोए भी कब थे हमें जगा लाते

अभिषेक शुक्ला

दर-ए-ख़याल भी खोलें सियाह शब भी करें

अभिषेक शुक्ला

चलते हुए मुझ में कहीं ठहरा हुआ तू है

अभिषेक शुक्ला

अभी तो आप ही हाइल है रास्ता शब का

अभिषेक शुक्ला

अब इख़्तियार में मौजें न ये रवानी है

अभिषेक शुक्ला

राह भटका हुआ इंसान नज़र आता है

अभिषेक कुमार अम्बर

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

अबीर अबुज़री

कुछ हक़ाएक़ के ज़िंदा पैकर हैं

अब्दुस्समद ’तपिश’

ताज़ा-दम जवानी रख

अब्दुस्समद ’तपिश’

पत्ते पत्ते से नग़्मा-सरा कौन है

अब्दुस्समद ’तपिश’

जिस्म के मर्तबान में क्या है

अब्दुस्समद ’तपिश’

जफ़ा के ज़िक्र पे वो बद-हवास कैसा है

अब्दुस्समद ’तपिश’

गरचे नेज़ों पे सर है

अब्दुस्समद ’तपिश’

देख कर मेरी अना किस दर्जा हैरानी में है

अब्दुस्समद ’तपिश’

अभी तक हौसला ठहरा हुआ है

अब्दुस्समद ’तपिश’

आँख थी सूजी हुई और रात भर सोया न था

अब्दुस्समद ’तपिश’

ये कौन मेरे अलावा मिरे वजूद में है

अब्दुर्राहमान वासिफ़

रोज़ वहशत कोई नई मिरे दोस्त

अब्दुर्राहमान वासिफ़

मेज़ क़लम क़िर्तास दरीचा सन्नाटा

अब्दुर्राहमान वासिफ़

जहान-ए-फ़िक्र पे चमकेगा जब सितारा मिरा

अब्दुर्राहमान वासिफ़