Love Poetry (page 386)

ज़ात उस की कोई अजब शय है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

तुम्हारी चश्म ने मुझ सा न पाया

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

सुन रख ओ ख़ाक में आशिक़ को मिलाने वाले

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

सितम सा कोई सितम है तिरा पनाह तिरी

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

पूछी न ख़बर कभी हमारी

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

नीम-चा जल्द म्याँ ही न मियाँ कीजिएगा

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

नहीं सुनता नहीं आता नहीं बस मेरा चलता है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

न अदा मुझ से हुआ उस सितम-ईजाद का हक़

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

म्याँ क्या हो गर अबरू-ए-ख़मदार को देखा

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

मरते दम नाम तिरा लब के जो आ जाए क़रीब

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

महफ़िल इश्क़ में जो यार उठे और बैठे

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

कुछ तौर नहीं बचने का ज़िन्हार हमारा

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

जान अपनी चली जाए हे जाए से कसू की

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

हर आन जल्वा नई आन से है आने का

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

ग़म याँ तो बिका हुआ खड़ा है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

गली से तिरी जो कि ऐ जान निकला

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

दोश-ब-दोश दोश था मुझ से बुत-ए-करिश्मा-कोश

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

दिलबर ये वो है जिस ने दिल को दग़ा दिया है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

दिल तो हाज़िर है अगर कीजिए फिर नाज़ से रम्ज़

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

बाग़ में जब कि वो दिल ख़ूँ-कुन-ए-हर-गुल पहुँचे

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

तुझ को अग़राज़-ए-जहाँ से मावरा समझा था मैं

अब्दुल रहमान बज़्मी

कैसे रखेंगे सर पे किसी का उधार हम

अब्दुल मतीन नियाज़

इंतिशार-ओ-ख़ौफ़ हर इक सर में है

अब्दुल मतीन नियाज़

हिज्र में गुज़री है उस रात की बातें न करो

अब्दुल मतीन नियाज़

हम-नफ़स ख़्वाब-ए-जुनूँ की कोई ता'बीर न देख

अब्दुल मतीन नियाज़

ग़म-ए-हयात ग़म-ए-दिल निशात-ए-जाँ गुज़रा

अब्दुल मतीन नियाज़

अपने वहम-ओ-गुमान से निकला

अब्दुल मतीन नियाज़

इल्तिफ़ात-ए-दोस्ताँ भी ज़लज़ला से कम नहीं

अब्दुल मन्नान तरज़ी

ज़लज़ले सख़्त आते रहे रात-भर

अब्दुल मन्नान तरज़ी

सुब्ह सफ़र और शाम सफ़र

अब्दुल मन्नान तरज़ी