Love Poetry (page 387)
पुर्सिश है चश्म-ए-अश्क-फ़शाँ पर न आए हर्फ़
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मुद्दआ'-ओ-आरज़ू शौक़-ए-तमन्ना आप हैं
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मिरी निगाह को जल्वों का हौसला दे दो
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मेरी आँखों में आँसू प्यारे
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मरहला शौक़ का है लफ़्ज़-ओ-बयाँ से आगे
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मर जाएँगे पिंदार का सौदा न करेंगे
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मैं पहुँचा अपनी मंज़िल तक मगर आहिस्ता आहिस्ता
अब्दुल मन्नान तरज़ी
क्या यहाँ देखिए क्या वहाँ देखिए
अब्दुल मन्नान तरज़ी
ख़्वाब की बस्ती में अफ़्साने का घर
अब्दुल मन्नान तरज़ी
ख़ून जब अश्क में ढलता है ग़ज़ल होती है
अब्दुल मन्नान तरज़ी
खुली जब आँख तो देखा कि था बाज़ार का हल्क़ा
अब्दुल मन्नान तरज़ी
जब निगाह-ए-तलब मो'तबर हो गई
अब्दुल मन्नान तरज़ी
हर वरक़ इक किताब हो जाए
अब्दुल मन्नान तरज़ी
हर आन नई शान है हर लम्हा नया है
अब्दुल मन्नान तरज़ी
ग़ज़ल में फ़न का जौहर जब दिखाते हैं ग़ज़ल वाले
अब्दुल मन्नान तरज़ी
आँख पर ए'तिबार हो जाए
अब्दुल मन्नान तरज़ी
ज़िंदगी तुझ से प्यार क्या करते
अब्दुल मन्नान समदी
नज़र की वुसअतों में कुल जहाँ था
अब्दुल मन्नान समदी
मेरे घर से उस की यादों के मकीं जाते नहीं
अब्दुल मन्नान समदी
दोस्तो ज़िंदगी अमानत है
अब्दुल मन्नान समदी
बज़्म में वो बैठता है जब भी आगे सामने
अब्दुल मन्नान समदी
वक़्त अब सर पे वो आया है कि सर याद नहीं
अब्दुल मलिक सोज़
मुझ से मेरी हयात रूठ गई
अब्दुल मलिक सोज़
कुछ हसीं यादें भी हैं दीदा-ए-नम के साथ साथ
अब्दुल मलिक सोज़
दिल ग़म-ए-इश्क़ के इज़हार से कतराता है
अब्दुल मलिक सोज़
दिल अपना याद-ए-यार से बेगाना तो नहीं
अब्दुल मलिक सोज़
आज क्यूँ चुप हैं तेरे सौदाई
अब्दुल मलिक सोज़
तुझे कुछ इश्क़ ओ उल्फ़त के सिवा भी याद है ऐ दिल
अब्दुल मजीद सालिक
इश्क़ है बे-गुदाज़ क्यूँ हुस्न है बे-नियाज़ क्यूँ
अब्दुल मजीद सालिक
चराग़-ए-ज़िंदगी होगा फ़रोज़ाँ हम नहीं होंगे
अब्दुल मजीद सालिक