Love Poetry (page 385)
अगर नहीं क़स्द ऐ ज़ालिम मिरे दिल के सताने का
अब्दुल वहाब यकरू
साकिन है कोई और वतन और किसी का
अब्दुल वहाब सुख़न
नई ग़ज़ल का नई फ़िक्र-ओ-आगही का वरक़
अब्दुल वहाब सुख़न
नए हैं वस्ल के मौसम मोहब्बतें भी नई
अब्दुल वहाब सुख़न
महक रहा है तसव्वुर में ख़्वाब की सूरत
अब्दुल वहाब सुख़न
ऐ मेरी आँखो ये बे-सूद जुस्तुजू कैसी
अब्दुल वहाब सुख़न
शेर कहने की तबीअत न रही
अब्दुल सलाम
दिल की हालत बयाँ नहीं होती
अब्दुल सलाम
आग सीनों में जला कर रखिए
अब्दुल सलाम
कहाँ थे शब इधर देखो हया क्यूँ है निगाहों में
अब्दुल रहमान रासिख़
यूँ अश्क बरसते हैं मिरे दीदा-ए-तर से
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
मोहब्बत का जिसे इरफ़ाँ नहीं है
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
मैं जानता हूँ कौन हूँ मैं और क्या हूँ मैं
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
क्या क्या सुपुर्द-ए-ख़ाक हुए नामवर तमाम
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
कोई नज़्र-ए-ग़म-ए-हालात न होने पाए
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
काश समझते अहल-ए-ज़माना
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
करते नहीं जफ़ा भी वो तर्क-ए-वफ़ा के साथ
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
जीत कर बाज़ी-ए-उल्फ़त को भी हारा जाए
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
ग़म से घबरा के कभी नाला-ओ-फ़रियाद न कर
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
दिल उन की मोहब्बत का जो दीवाना लगे है
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
अदब में मुद्दई-ए-फ़न तो बे-शुमार मिले
अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची
उल्फ़त में तेरा रोना 'एहसाँ' बहुत बजा है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
तनख़्वाह एक बोसा है तिस पर ये हुज्जतें
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
नमाज़ अपनी अगरचे कभी क़ज़ा न हुई
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
मय-कदे में इश्क़ के कुछ सरसरी जाना नहीं
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
कौन सानी शहर में इस मेरे मह-पारे की है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़ुंचा को मैं ने चूमा लाया दहन को आगे
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
गर है दुनिया की तलब ज़ाहिद-ए-मक्कार से मिल
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
एक बोसे से मुराद-ए-दिल-ए-नाशाद तो दो
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
अँधेरी रात को मैं रोज़-ए-इश्क़ समझा था
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी