Love Poetry (page 388)

वो है हैरत-फ़ज़ा-ए-चश्म-ए-मा'नी सब नज़ारों में

अब्दुल मजीद सालिक

न मोहतसिब की न हूर-ओ-जिनाँ की बात करो

अब्दुल मजीद सालिक

ख़िरद में मुब्तिला है 'सालिक' दीवाना बरसों से

अब्दुल मजीद सालिक

हम-नफ़सो उजड़ गईं मेहर-ओ-वफ़ा की बस्तियाँ

अब्दुल मजीद सालिक

ग़म के हाथों मिरे दिल पर जो समाँ गुज़रा है

अब्दुल मजीद सालिक

चराग़-ए-ज़िंदगी होगा फ़रोज़ाँ हम नहीं होंगे

अब्दुल मजीद सालिक

ज़िंदगी छोटी है सामान बहुत

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

कहाँ शिकवा ज़माने का पस-ए-दीवार करते हैं

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

जब कोई मेहरबान होता है

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

बेवफ़ा कहिए बा-वफ़ा कहिए

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

अब चराग़ों में ज़िंदगी कम है

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

ये शबाब-ए-हुस्न ये हुस्न-ए-शबाब

अब्दुल मजीद हैरत

मरहम-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर हो जाए

अब्दुल मजीद हैरत

मरहम ज़ख़्म-ए-जिगर हो जाए

अब्दुल मजीद हैरत

ईमाँ-नवाज़ गर्दिश-ए-पैमाना हो गई

अब्दुल मजीद हैरत

ईमाँ-नवाज़ गर्दिश-ए-पैमाना हो गई

अब्दुल मजीद हैरत

शाम-ए-ग़म और सितारों के सिवा

अब्दुल मजीद भट्टी

ज़िंदगी ज़ोर है रवानी का

अब्दुल हमीद अदम

ज़िंदगी है इक किराए की ख़ुशी

अब्दुल हमीद अदम

वो अहद-ए-जवानी वो ख़राबात का आलम

अब्दुल हमीद अदम

वही शय मक़सद-ए-क़ल्ब-ओ-नज़र महसूस होती है

अब्दुल हमीद अदम

थोड़ी सी अक़्ल लाए थे हम भी मगर 'अदम'

अब्दुल हमीद अदम

तकलीफ़ मिट गई मगर एहसास रह गया

अब्दुल हमीद अदम

मैं यूँ तलाश-ए-यार में दीवाना हो गया

अब्दुल हमीद अदम

मैं उम्र भर जवाब नहीं दे सका 'अदम'

अब्दुल हमीद अदम

मैं बद-नसीब हूँ मुझ को न दे ख़ुशी इतनी

अब्दुल हमीद अदम

लोग कहते हैं कि तुम से ही मोहब्बत है मुझे

अब्दुल हमीद अदम

कश्ती चला रहा है मगर किस अदा के साथ

अब्दुल हमीद अदम

कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं

अब्दुल हमीद अदम

जी चाहता है आज 'अदम' उन को छेड़िए

अब्दुल हमीद अदम