Love Poetry (page 391)
अफ़्साना चाहते थे वो अफ़्साना बन गया
अब्दुल हमीद अदम
आता है कौन दर्द के मारों के शहर में
अब्दुल हमीद अदम
आप की आँख अगर आज गुलाबी होगी
अब्दुल हमीद अदम
आँखों से तिरी ज़ुल्फ़ का साया नहीं जाता
अब्दुल हमीद अदम
आगही में इक ख़ला मौजूद है
अब्दुल हमीद अदम
बरसते थे बादल धुआँ फैलता था अजब चार जानिब
अब्दुल हमीद
उसे देख कर अपना महबूब प्यारा बहुत याद आया
अब्दुल हमीद
साए फैल गए खेतों पर कैसा मौसम होने लगा
अब्दुल हमीद
कुछ अपना पता दे कर हैरान बहुत रक्खा
अब्दुल हमीद
कितनी महबूब थी ज़िंदगी कुछ नहीं कुछ नहीं
अब्दुल हमीद
दिल में जो बात है बताते नहीं
अब्दुल हमीद
लहू की बूँद मिस्ल-ए-आइना हर दर पे रक्खी थी
अब्दुल हमीद साक़ी
इस से पहले कि हमें अहल-ए-जफ़ा रुस्वा करें
अब्दुल हमीद साक़ी
हुस्न इक दरिया है सहरा भी हैं उस की राह में
अब्दुल हफ़ीज़ नईमी
इस तिलिस्म-ए-रोज़-ओ-शब से तो कभी निकलो ज़रा
अब्दुल हफ़ीज़ नईमी
होंकते दश्त में इक ग़म का समुंदर देखो
अब्दुल हफ़ीज़ नईमी
हर इंसाँ अपने होने की सज़ा है
अब्दुल हफ़ीज़ नईमी
ग़ुबार-ए-दर्द से सारा बदन अटा निकला
अब्दुल हफ़ीज़ नईमी
गर्द-ए-फ़िराक़ ग़ाज़ा कश-ए-आइना न हो
अब्दुल हफ़ीज़ नईमी
दुआ को हाथ मिरा जब कभी उठा होगा
अब्दुल हफ़ीज़ नईमी
बहार बन के ख़िज़ाँ को न यूँ दिलासा दे
अब्दुल हफ़ीज़ नईमी
ज़ाहिरन मौत है क़ज़ा है इश्क़
अब्दुल ग़फ़ूर नस्साख़
ज़ाहिरन मौत है क़ज़ा है इश्क़
अब्दुल ग़फ़ूर नस्साख़
पीरी में शौक़ हौसला-फ़रसा नहीं रहा
अब्दुल ग़फ़ूर नस्साख़
ताकीद करो ज़मज़मा-संजान-ए-चमन को
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद
क़ुर्ब नस नस में आग भरता है
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद
क़ज़ा से क़र्ज़ किस मुश्किल से ली उम्र-ए-बक़ा हम ने
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद
नख़चीर हूँ मैं कश्मकश-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र का
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद
मैं बात कौन से पैरा-ए-बयाँ में करूँ
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद
भूलों उन्हें कैसे कैसे कैसे
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद