Love Poetry (page 56)

फाँदती फिरती हैं एहसास के जंगल रूहें

हसन अख्तर जलील

निभाओ अब उसे जो वज़्अ भी बना ली है

हसन अख्तर जलील

ख़ला के दश्त में ये तुर्फ़ा माजरा भी है

हसन अख्तर जलील

कर के संग-ए-ग़म-ए-हस्ती के हवाले मुझ को

हसन अख्तर जलील

जलती हुई रुतों के ख़रीदार कौन हैं

हसन अख्तर जलील

इक भयानक तीरगी है रौशनी ऐ रौशनी

हसन अख्तर जलील

दिल को आमादा-ए-वफ़ा रखिए

हसन अख्तर जलील

दिल की तरफ़ निगाह-ए-तग़ाफ़ुल रहा करे

हसन अख्तर जलील

बरसों तिरी तलब में सफ़ीना रवाँ रहा

हसन अख्तर जलील

आरज़ू की हमा-हामी और मैं

हसन अख्तर जलील

आई पतझड़ गिरे फ़स्ल-ए-गुल के निशाँ रात-भर में

हसन अख्तर जलील

वफ़ा परछाईं की अंधी परस्तिश

हसन अकबर कमाल

दिल में तिरे ख़ुलूस समोया न जा सका

हसन अकबर कमाल

रंग-ए-सियाह के नाम एक नज़्म

हसन अकबर कमाल

माज़ी में रह जाने वाली आँखें

हसन अकबर कमाल

ऐ फ़ैरी-टेल

हसन अकबर कमाल

वो शख़्स तो मुझे हैरान करता जाता था

हसन अकबर कमाल

उस इक उम्मीद को तो राहत-ए-सफ़र न समझ

हसन अकबर कमाल

सफ़्फ़ाक सराब से ज़ियादा

हसन अकबर कमाल

पाया जब से ज़ख़्म किसी को खोने का

हसन अकबर कमाल

क्या होता है ख़िज़ाँ बहार के आने जाने से

हसन अकबर कमाल

क्या गुमाँ था कि न होगा कोई हम-सर अपना

हसन अकबर कमाल

हो तेरी याद का दिल में गुज़र आहिस्ता आहिस्ता

हसन अकबर कमाल

है तन्हाई में बहना आँसुओं का

हसन अकबर कमाल

ग़ज़ल में हुस्न का उस के बयान रखना है

हसन अकबर कमाल

ग़म-ए-जाँ गुम ग़म-ए-दुनिया में तो होना मुश्किल

हसन अकबर कमाल

दुनिया में कितने रंग नज़र आएँगे नए

हसन अकबर कमाल

दुख उठाओ कितने ही घर बहार करने में

हसन अकबर कमाल

दूध जैसा झाग लहरें रेत और ये सीपियाँ

हसन अकबर कमाल

दूध जैसा झाग लहरें रेत और ये सीपियाँ

हसन अकबर कमाल