Love Poetry (page 55)
क्या कहूँ क्या है मेरे दिल की ख़ुशी
हसन बरेलवी
जो ख़ास जल्वे थे उश्शाक़ की नज़र के लिए
हसन बरेलवी
इश्क़ में बे-ताबियाँ होती हैं लेकिन ऐ 'हसन'
हसन बरेलवी
बोले वो बोसा-हा-ए-पैहम पर
हसन बरेलवी
अब्र है गुलज़ार है मय है ख़ुशी का दौर है
हसन बरेलवी
वो मुझ से बे-ख़बर हैं उन की आदत ही कुछ ऐसी है
हसन बरेलवी
वो मन गए तो वस्ल का होगा मज़ा नसीब
हसन बरेलवी
उन का जल्वा नहीं देखा जाता
हसन बरेलवी
तुम भी हो ख़ंजर-ए-खुशाब भी है
हसन बरेलवी
मिल गया दिल निकल गया मतलब
हसन बरेलवी
मिरे मरने से तुम को फ़िक्र ऐ दिलदार कैसी है
हसन बरेलवी
कुछ हसीनों की मोहब्बत भी बुरी होती है
हसन बरेलवी
कहा जब तुम से चारा दर्द-ए-दिल का हो नहीं सकता
हसन बरेलवी
जल्वे तिरे जो रौनक़-ए-बाज़ार हो गए
हसन बरेलवी
जल्वे तिरे जो रौनक़-ए-बाज़ार हो गए
हसन बरेलवी
हुस्न जब मक़्तल की जानिब तेग़-ए-बुर्राँ ले चला
हसन बरेलवी
हुस्न जब मक़्तल की जानिब तेग़-ए-बुर्राँ ले चला
हसन बरेलवी
हाल-ए-मर्ग-ए-बे-कसी सुन कर असर कोई न हो
हसन बरेलवी
देखे अगर ये गर्मी-ए-बाज़ार आफ़्ताब
हसन बरेलवी
छुप गया यार ख़ुद-नुमा हो कर
हसन बरेलवी
चश्म-ए-ज़ाहिर से रुख़-ए-यार का पर्दा देखा
हसन बरेलवी
चश्म-ए-जुनूँ में हुस्न-ए-सलासिल है बे-क़रार
हसन बख़्त
ख़ुद पर कोई तूफ़ान गुज़र जाने के डर से
हसन अज़ीज़
जो नक़्श-ए-बर्ग-ए-करम डाल डाल है उस का
हसन अज़ीज़
इक क़िस्सा-ए-तवील है अफ़्साना दश्त का
हसन अज़ीज़
अजीब हाल है सहरा-नशीं हैं घर वाले
हसन अज़ीज़
फ़िक्र-ए-मंज़िल है न नाम-ए-रहनुमा लेते हैं हम
हसन अज़ीमाबादी
सीने में चराग़ जल रहा है
हसन अख्तर जलील
शब की दहलीज़ से किस हाथ ने फेंका पत्थर
हसन अख्तर जलील
रात लम्बी भी है और तारीक भी शब-गुज़ारी का सामाँ करो दोस्तो
हसन अख्तर जलील